शवों की अदला-बदली मामले में मंगलवार को दोनों मरीजों के परिजनों ने एसडीएम शिव राज बल के सामने पेश होकर बयान दर्ज करवाए। पदमा के परिजनों ने मीडिया को बताया कि वह कैंसर की मरीज थी। उसका इलाज जीएनडीएच में चल रहा था। डॉक्टरों ने उसके कोरोना टेस्ट करवाए तो वह पॉजिटिव निकली।
पदमा के पिता ने कहा कि उनको 18 जुलाई को अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनकी बेटी की मौत हो गई है। परिजन शहीदां साहिब के साथ सटे श्मशानघाट में शाम पांच बजे पहुंचे। पौने छह बजे लाश पहुंची। उन्होंने शव के अंतिम दर्शन की मांग की लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने मना कर दिया। अस्पताल के स्टाफ ने ही लाश पर लकड़ी रखी। 19 जुलाई को उन्हें संदेश मिला कि आपकी बेटी की लाश तो मुकेरियां के सिविल अस्पताल के मोर्चरी में रखी हुई है। इसी दिन 11 बजे उन्हें गुरु नानक देव अस्पताल में रखी अपनी बेटी की लाश की पहचान करने के लिए बुलाया गया। पदमा की लाश को अस्पताल से ले जाकर शहीदां साहिब गुरुद्वारा साहिब के साथ सटे श्मशानघाट में किया गया। अस्पताल की लापरवाही के कारण परिवार को दो बार अंतिम संस्कार करना पड़ा।
प्रीतम सिंह के परिजनों ने इस मामले पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका भी दर्ज करवाई हुई है। परिजनों का दावा है कि उनके बुजुर्ग जीवित हैं। जिला प्रशासन ने अदालत में स्वीकार किया है कि लाशों की अदला-बदली हुई है।
आरोपियों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा : एसडीएम
एसडीएम शिवराज सिंह बल ने कहा कि इस मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है। जो भी आरोपी होगा, उसको कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं। उनकी और क्या शिकायतें हैं। इस मामले में उनको कौन सी समस्याएं झेलनी पड़ी, इन मुद्दों पर उनके बयान रिकॉर्ड किए गए हैं।