मां ने सपना देखा था कि उसके तीन बेटे पढ़ लिखकर अच्छी कमाई करेंगे। जीवन में हर पल उसका साथ देंगे। पर ये सपना अधूरा ही रह गया।
मकबूलपुरा की शशि पत्नी रंजीत सिंह ने बताया कि उसके तीन बच्चे थे। तीनों ही नशे के कारण अब इस दुनिया में नहीं रहें।
शशि ने बताया बेटे राजविंद्र सिंह (23) की मौत नशे की वजह से 2006 में हो गई। दूसरा बेटा विक्रमजीत सिंह (19) स्मैक के नशे आदी हो गया। इलाज के दौरान र्व। 2015 में उसकी मौत हो गई।
इसी तरह सबसे छोटा बेटा लखविंद्र सिंह (19) को नशे के टीके लगाने की आदत पड़ गई। जनवरी 2016 में उसने दम तोड़ दिया। घर का खर्च कढ़ाई का काम से चलता है।
इसी तरह हीरा सिंह, बलदेव सिंह, सरबजीत सिंह, रंजीत सिंह, लवली, जैसे युवक नशे के कारण अपनी जिंदगी का अधूरा सफर छोड़कर चल बसें है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने पंद्रह मिनट इन परिवारों के दुख तकलीफ सुनीं। साथ ही भरोसा दिया कि आप पंजाब में सत्ता हासिल करने पर सबसे पहले नशे के सौदागरों को जेल भेजेगी। इसके अलावा जिन परिवारों के बच्चे नशे के कारण जान गवां चुके हैं, उन्हें तीन हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी।