गुरु नगरी में विकास के नाम पर शहर की हरियाली की बलि चढ़ाई जा रही है। पंजाब सरकार की ओर से शुरू किये जा रहे विकास कार्यों के बदले यहां चंद दिनों में ही बड़ी तादात में हरे पेड़ काटे जा चुके हैं। इस बीच शहर के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठानी शुरू कर दी है।
मामले को लेकर पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने वाले संगठनों ने संसदीय सचिव नवतोज कौर सिद्धू से भी संपर्क कर आंदोलन की चेतवानी दी है। अब संगठन एक संयुक्त मोर्चा बनाकर गुरु नगरी की हरियाली बचाने की रणनीति बनाने लगे हैं। अमृतसर में कचहरी चौंक से लेकर एयर पोर्ट रोड़ को चौड़ा किया जा रहा है। इस के चलते इस सड़क के आसपास के सभी वृक्ष काट दिये गए हैं।
सब से अधिक लोगों को यह बात चुभ रही है कि काटे गए वृक्षों की जगह नए वृक्ष नहीं लगाए गए हैं। शहर मे बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर न तो नेता और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी गंभीर है। यहां तक के इन वृक्षों को काटने से पहले निर्माण का काम करने वाली एजेंसियों ने वन विभाग से कोई एनओसी भी नहीं लिया। वन नीति के अनुसार किसी भी शहर और राज्य में वहा के क्षेत्रफल के हिसाब से 33 प्रतिशत वन होने चाहिए। परंतु अमृतसर सिटी में वृक्षों व वनों की संख्या 4 प्रतिशत से भी कम हो गई है।
इस संबंध में एनजीओ जिला वन विभाग के अधिकारियों को भी मिले। परंतु वन विभाग ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। पर्यावरण रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले एनजीओ मिशन आगाज ने नेता दीपक बब्बर, लोक कल्याण समिति से जगमोहन सिंह, खुदाई खिदतमतगार के पीएस भट्टी ने कहा कि शहर में अंधा धूंध काटे जा रहे वृक्षों मे ंबहुत से वृक्ष पीपल और बरगद व फलों वाले भी है।
जिन को काटने पर पहले ही रोक लगी हुई है। इसी तरह जीटी रोड़ पर खालसा कालेज ओर जीएनडीयू के आसपास के वृक्ष भी काटे जा रहे हैं।