विजिलेंस अमृतसर ने छेहरटा निवासी ललित अरोड़ा को छेहरटा थाने के एसएचओ विनोद शर्मा की ओर से पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों वीरवार को गिरफ्तार किया था। इंस्पेक्टर विनोद शर्मा विजिलेंस ब्यूरो की पकड़ से दूर है। मगर विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अपनी जांच को तेज कर दिया गया है। इंस्पेक्टर विनोद शर्मा के बैंक अकाउंट और प्रॉपर्टी के साथ-साथ पकड़े गए दलाल ललित की भी प्रॉपर्टी की जांच शुरू कर दी गई है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इंस्पेक्टर विनोद शर्मा के लिए लोगों को धमका कर करोड़ों रुपये इकट्ठे कर चुके दलाल ललित की आलीशान कोठी है। इसके अलावा शहर के सबसे पॉश इलाका लॉरेंस रोड और रेलवे स्टेशन के सामने भी ललित की करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी सामने आई है। कबाड़ का काम करने वाले के पास इतनी प्रॉपर्टी जांच का विषय बन चुकी है।
विनोद शर्मा के साथ तैनात उसके गनमैन कांस्टेबल नवदीप सिंह और कांस्टेबल दौलतबीर सिंह की तलाश की जा रही है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दोनों गनमैन को भी जांच में शामिल कर लिया गया है विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि इंस्पेक्टर विनोद शर्मा और उसके दलाल ललित शर्मा के कई ऐसे राज हैं जो दोनों गनमैन के पास है। इसलिए दोनों गनमैन को भी जांच में शामिल किया जाएगा और तलाश जारी है। यह दोनों भी पिछले चार दिनों से फरार है और मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं।
करोड़ों का हो चुका है लेेनदेन
पिछले कई महीनो से थाना छेहरटा का एसएचओ विनोद शर्मा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के कारण चर्चा में था । अब तक वह अपने साथी ललित अरोड़ा के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन कर चुका है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार ललित अरोड़ा इस समय रिमांड पर हैं। रिमांड के दौरान ललित से कई बड़े खुलासे हो रहे हैं।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ललित अरोड़ा इंस्पेक्टर विनोद शर्मा का काफी नजदीकी साथी था। इसलिए थाने में किसी भी व्यक्ति को पकड़ कर छोड़ने के मामले में सौदेबाजी से लेकर रुपये इकट्ठा करने की जिम्मेदारी ललित की थी। थाने में स्टाफ के साथ-साथ ऊपर वाले रैंक के अधिकारियों की थाने में नहीं चलती थी। केवल ललित की ही तूती बोलती थी। ललित गजेटेड अधिकारी की तरह थाने में आता जाता था और उसकी थाने में भी खूब खातिरदारी होती थी। जो काम ऊपर वाले अधिकारियों के कहने पर विनोद शर्मा नहीं करता था वह काम ललित के माध्यम से लेनदेन के बाद होते थे। थाने में आम व्यक्ति के दाखिल होने से पहले पूछताछ की जाती है। मगर ललित के लिए थाना छेहरटा के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे।
वह बिना किसी रोक-टोक के थाने के अंदर आता जाता था और उसके लिए एसएचओ के कमरे में अलग से कुर्सी रखी गई थी।
विजिलेंस ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि छेहरटा निवासी विक्रम कुमार उर्फ विक्की निवासी आजाद नगर छेहरटा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद ललित की गिरफ्तारी की गई है। ललित अरोड़ा गली बाबा भौडे वाली नजदीक संधू हॉस्पिटल छेहरटा का रहने वाला है।
शिकायत में बताया गया था कि एसएचओ और उनकी टीम उसके घर आए थे। जिन्होंने उस पर और उसके चचेरे भाई पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया था। पुलिस ने कथित तौर पर दोनों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की चेतावनी दी थी और शिकायतकर्ता की एक कार जब्त करने का दावा किया था, जिसमें कथित तौर पर मादक पदार्थ बरामद किए गए थे।
शिकायत के अनुसार, बाद में शिकायतकर्ता ने मामले को सुलझाने में मदद के लिए एसएचओ के एक परिचित ललित अरोड़ा से संपर्क किया। अरोड़ा ने कथित तौर पर एसएचओ की तरफ़ से ड्रग केस दर्ज न करने के लिए 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता ने तुरंत पूरी रकम देने में असमर्थता जताई और कहा कि वह केवल 5 लाख रुपये का इंतजाम कर सकता है, जिसे अरोड़ा पहली किश्त के रूप में देने के लिए तैयार हो गए।
आरोपों की पुष्टि के बाद, अमृतसर रेंज विजिलेंस ब्यूरो टीम ने जाल बिछाया और दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए ललित अरोड़ा को रंगे हाथों पकड़ लिया। वहीं इंस्पेक्टर विनोद शर्मा के साथ तैनात गनमैन और कांस्टेबल दौलत वीर सिंह हमेशा विवादों में रहा है। कुछ महीने पहले ही सीधे कांस्टेबल भर्ती होने के बाद दौलत वीर सिंह की तैनाती थाना मकबूलपुरा में की गई थी। मकबूल पुरा थाने के अंतर्गत आते इलाकों में अपराधियों के साथ मिली भगत और अवैध वसूली की शिकायतें मिलने के बाद उसे बदल दिया गया था। तबादले के बाद सिफारिश करवा कर वह फिर से थाना छेहरटा में पहुंच गया है।