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श्री टाहली साहिब में कमेटी विवाद

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एसजीपीसी सदस्य ने लगाया मंत्री पर पक्षपात का आरोप
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श्री टाहली साहिब में कमेटी विवाद, कहा- टकराव होने पर मंत्री होंगे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर। गुरुद्वारा श्री टाहली साहिब में कमेटी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को एक तरफ जहां इंदरजीत सिंह बागी के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया। वहीं दूसरे दिन अन्य गुट ने गुरदासपुर के सिंह सभा गुरुद्वारे में गुरिंदर सिंह गोरा एसजीपीसी सदस्य की अध्यक्षता में बैठक कर कमेटी को गलत ठहराया और मंत्री पर पक्षपात का आरोप लगाया।
पत्रकार वार्ता में गुरिंदर सिंह गोरा ने बताया कि अदालत ने ही गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का फैसला सुलखन सिंह सेखा के पक्ष में किया था। लेकिन सत्ताधारी पक्ष ने जान बूझकर सुलखन सिंह को मानसिक तौर पर परेशान कर दबाव डाला। सेखा को कथित तौर पर धमकी तक दी गई कि अगर वह गुरुद्वारा परिसर के आसपास भी दिखाई दिए तो उनके साथ कुछ भी हो सकता है। पत्रकारों से बातचीत में गुरिंदर सिंह गोरा ने बताया कि पहले कमेटी का चुनाव समूह संगत की उपस्थिति में होता था, लेकिन इस बार नादर शाही फरमान देते हुए मंत्री के इशारे पर कमेटी का गठन कर दिया, गया जो गलत है।
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गोलक को लेकर ही लड़ाई
बात दें कि गुरदासपुर के सीमावर्ती क्षेत्र दौरांगला के गांव गाहलड़ी में एतिहासिक गुरुद्वारा टाहली साहिब जिसे बाबा श्री चंद गुरुद्वारे के नाम से भी जाना जाता है। इस गुरुद्वारे में दूर दूर से लोग नतमस्तक होने आते हैं। ऐसे में गुरुद्वारे में होने वाले चढ़ावे की कीमत भी लाखों में होती है। मामले संबंधी जब पत्रकारों ने कहा कि गुल्लक की लड़ाई है तो गुल्लक को अगर हटा दिया जाए तो भी क्या सिख संगत गुरुद्वारे में सेवा करेगी। इस बात का जवाब देते हुए सिख नेता गोरा ने कहा कि संग्रह से भी गुरुद्वारे में सेवा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन गुरुद्वारा परिसर में मैनेजर कमेटी और ऑडिट टीम पूरा लेखा-जोखा रखती है। जिसके चलते गुल्लक में होने वाले चढ़ावे के संबंध में कोई भी विवाद नहीं है।
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सिखों में हुआ टकराव तो जिम्मेदार मंत्री
गुरुद्वारे परिसर में अक्सर टकराव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ता है, जिसके चलते अब गुरुद्वारा परिसर में माहौल तनावपूर्ण बन चुका है। दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं। हालांकि सुलखन सिंह सेखा के पक्ष में वक्ताओं की ओर से गुरदासपुर में बैठक की गई, लेकिन वे इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए। बीबी मजबूर, गुरिंदर सिंह गोरा व अन्य ने कहा कि अगर गुरुद्वारा परिसर में सिखों के बीच टकराव हुआ तो उसके लिए मंत्री ही जिम्मेदार होंगे।
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