जम्मू कश्मीर की अम्बफाला जिला जेल में आत्महत्या करने वाले पाकिस्तानी कैदी 43 वर्षीय शौकत अली का शव सोमवार को भारत सरकार की ओर से पाकिस्तानी रेंर्जस को अटारी वाघा बार्डर पर सौंप दिया गया।
शौकत अली पहले भी सजा पूरी करके पाकिस्तान भेजा जा चुका है, लेकिन वह दूसरी बार बार्डर पार करके भारत में गैर कानूनी ढंग से प्रवेश किए जाने के कारण पकड़ा गया था।
इस समय वह अम्बफाला जिला जेल में बंद था। पाकिस्तानी रेंर्जस को शौकत अली का शव सौंपने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने बताया कि अली पाकिस्तान क े जिला सियालकोट की तहसील पसरूर के गांव सियाल जट्टां का रहने वाला था। जेल के नौ नंबर बैरक के शौचालय में उसका शव लटकता हुआ जेल अधिकारियों को मिला था। शौचालय में एक लोहे की राड के साथ उसने लटक कर आत्म हत्या कर ली थी। अली पहली बार वर्ष 2008 में पकड़ा गया था।
जब वह बार्डर पार करके भारतीय सीमा के अंदर आया था। वर्ष 2010 में उसे रिहा करके पाकिस्तान को सौंपा गया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2011 को उसे फिर आरीना सेक्टर में गैर कानूनी ढंग से भारतीय क्षेत्र में सीमा पार करके प्रवेश करने के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था। अली ने लच्छा का फंदा बना कर जेल के शौचालय में आत्महत्या की है। जम्मू के मैजिस्ट्रेट अजीत कुमार साहू ने इस घटना की पहले ही जांच के आदेश दिए हुए है। इस संबंध में जम्मू में एफआईआर भी दर्ज की गई है। दर्ज एफआईआर के दस्तावेज भी अली के शव के साथ पाकिस्तान भेजे गए है। अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया है कि अली मानसिक दबाव में रहता था। वह मानसिक परेशानियों के कारण दवाईयां भी ले रहा था। मनोचिकित्सकों की ओर से उसका समय समय पर चैकअप भी किया जाता था। वह अपने अन्य जेल साथियों के साथ आम तौर पर इकट्ठा ही खाना खाया करता था।