गांव भंगवां के सरपंच पर रविदास मंदिर के चल रहे निर्माण को गिराने, धार्मिक पुस्तक के पन्ने फाड़ने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगा है।
घटना की जानकारी पर मिलने के बाद मौके पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मंदिर को अपने कब्जे में ले लिया और आरोपियों पर कार्रवाई का भरोसा देकर घटना से भड़के लोगों को शांत किया। पुलिस ने सरपंच समेत चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी हलका विधायक से मिली ढाई लाख रुपये की ग्रांट से मंदिर का विस्तार किया जा रहा था। गांव का सरपंच जीत राम लंबे समय से मंदिर में पुजारी का काम करता था। बीते कुछ वर्षों से गांव का एक अन्य व्यक्ति मोहन लाल मंदिर में सेवा कर रहा है। लोगों की मांग पर विधायक गुरबचन सिंह बब्बेहाली ने गांव की मंदिर कमेटी को ढाई लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी। ग्रांट मिलने के बाद मंदिर की कमेटी की सहमति से मोहन लाल ने काम शुरू करवा दिया। इससे पहले मंदिर में रखी भगवान रविदास की मूर्ति को जंज घर के एक कमरे में स्थापित कर दिया तथा अमृतबाणी की पुस्तकें भी वहीं रख दीं।
आरोप है कि रविवार को गांव के सरपंच जीत राम नेनिर्माण कार्य को रुकवा दिया तथा कहा कि यह जमीन जंज घर की है, जिसके चलते यहां मंदिर नहीं बन सकता। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों ने विधायक से मिलने का फैसला किया. मोहन लाल व गांव वासियों ने बताया कि रविवार देर शाम सरपंच जीत राम अपने लड़के व गांव के ही कुछ अन्य लोगों के साथ आए ौर मंदिर के चल रहे निर्माण को गिरा दिया। साथ ही कमरे में रखी मूर्ति को गिराकर अमृतबाणी पुस्तक को भी फाड़ दिया। इसके बाद जब गांव के लोग एकत्र होने लगे तो सरपंच ने कहा निर्माण उसकी मंजूरी के बिना नहीं हो सकता।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत किया। तिब्बड़ थाने के एस एच ओ हरजिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मंदिर में बने कमरे को ताला लगाकर अपने कब्जे में ले लिया। फाड़ी गई अमृतबाणी भी कब्जे में ले ली है आरोपी विशाल उर्फ तोता, सरपंच जीत राम, धर्मपाल उर्फ पंजू और जसपाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की तलाश में छापामारी की जा रही है।