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किसान व पंथक विचारधारा से जुड़े सिख शिअद(बादल) का गावों में करे बहिष्कार:भाई रंजीत सिंह

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अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह ने किसानों व पंथक विचारधारा के साथ जुड़े सिखों से आह्वान किया है कि एसजीपीसी को बादल परिवार से मुक्त करवाने के लिए शिअद (बादल) के साथ जुड़े सभी लीडरशिप का गांवों में बहिष्कार किया जाए। सिखों की हजारों कुर्बानियों के बाद एसजीपीसी का गठन हुआ था। आज उस पर एक निर्गुणे सिख व्यापारिक घराने बादल परिवार का कब्जा हो चुका है। सिख अलग-अलग गुटों में न बंटें। एसजीपीसी से बादल परिवार का कब्जा हटा तो शिअद का पंथक स्वरूप बहाल होगा। सिख बादल मुक्त शिअद के लिए अहिंसा के मार्ग पर चलकर एक लहर पैदा करें, जिससे सिख संगठनों को पुनर्जीवित किया जा सके। भाई रणजीत सिंह शनिवार बाद दोपहर सचखंड के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर एक विशाल सिख पंथक की भीड़ को संबोधित कर रहे थे। भाई रणजीत सिंह ने लापता पावन स्वरूपों व सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के बहुमूल्य खजाने पर गोबिंद लौंगोवाल से कई प्रश्न पूछे। वहीं लौंगोवाल भाई रणजीत सिंह द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने के लिए नहीं पहुंचे।
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रणजीत सिंह ने एसजीपीसी की कार्यप्रणाली को पंथक कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब व गुरुद्वारा शहीदां साहिब में प्रतिदिन एक करोड़ का चढ़ावा व एक करोड़ कड़ाह प्रसाद से कमाई हो रही है। इस तरह एसजीपीसी 78 अन्य बड़े गुरुद्वारा साहिब का संचालन करती है। दो गुरुद्वारा साहिबान की वार्षिक आय 1400 करोड़ है, इसके बावजूद भी कमेटी घाटे में है। इसका अर्थ है कि गुरु की गोलक अब गरीब के लिए नहीं, बादल परिवार की जागीर बन रह गई है। बादल समर्थकों के घरों में कमेटी के 400 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनका वेतन गुरु की गोलक से दिया जा रहा है। बादल परिवार के पास लोगों द्वारा दी गई हजारों एकड़ भूमि का कब्जा है।
आधारहीन सिख को एसजीपीसी अध्यक्ष व जत्थेदार किया जाता है नियुक्त
भाई रणजीत सिंह ने कहा कि बादल परिवार उस एसजीपीसी सदस्य को सिखों की महान संस्था का प्रधान नियुक्त करता है, जिसका कोई राजनीतिक या पंथक अस्तित्व न हो, ताकि वह एसजीपीसी का संचालन अपनी मर्जी से करवा सके। इसी तरह बादल परिवार श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार उस सिख को नियुक्त करता है जिसका कोई धार्मिक आधार न हो, ताकि पंथक मर्यादाओं व परंपराओं के बारे में बादल परिवार से कोई पूछने की हिम्मत न कर सके। बादल ने गुरु साहिबान की बख्शी हुई पंज प्यारों की संस्था को अपने पैरों के नीचे रौंद के रखा है। पंज प्यारे गुरु के नहीं बादल परिवार के नौकर बन कर रह गए हैं।
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एसजीपीसी चुनावों देरी से करवाने के लिए बादल परिवार रचता रहा साजिश
भाई रणजीत सिंह ने कहा कि बादल परिवार अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर एसजीपीसी के चुनाव देरी से करवाने की साजिश रचता रहा है। विधानसभा व लोकसभा चुनाव हर पांच वर्ष के बाद संविधान के अनुसार होते हैं। अंग्रेज सरकार ने गुरुद्वारा एक्ट के तहत एसजीपीसी का गठन किया था। इसके चुनाव हर पांच वर्ष बाद क्यों नहीं करवाए जाते। जिस संस्था के गठन के लिए सिखों ने अपना खून दिया था, बादल परिवार अपनी सुविधा के अनुसार एसजीपीसी के चुनाव करवाता रहा है, ताकि गुरु की गोलक कहीं उससे छिन न जाए। सिख अपने सीखी स्वरूप पर पहरा देते हुए बादल परिवार के विरुद्ध लामबंद हों, ताकि पंथक संस्थाओं की साख को दोबारा बहाल किया जा सके।
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