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176 वर्ष के बाद बाबा सिंह व उनके सैनिकों की शहादत पर हुई अरदास

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शेरे-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की मौत के बाद कई गुटों में बंटे सिख शासन काल के सैनिकों ने तत्कालीन डोगरा शासकों के बहकावे में आकर बाबा बीर सिंह नोरंगाबादी व अन्य सिख फौजियों को शहीद कर दिया था। इस घटना के लगभग 176 वर्ष बाद पश्चाताप अरदास करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। सिख इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सिख योद्धा व उसके सैनिकों की सिखों द्वारा की गई हत्या के लिए पश्चाताप अरदास श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित की गई।
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इस अवसर पर सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी जत्थे भाई कुलदीप सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पिछले माह एसजीपीसी को निर्देश दिए थे कि सिखों के इस महान योद्धा व उसके सैनिकों की हत्या सिखों ने की थी। इसकी पश्चाताप अरदास कार्रवाई जाए। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने जत्थेदार द्वारा दिए गए आदेश के बाद इस समागम का आयोजन किया।
प्रोफेसर सरचांद सिंह ने पूरी की धार्मिक सजा
श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सिख पंथ से निष्कासित पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह के साथ सांझ रखने के आरोप में तनखैया घोषित दमदमी टकसाल के प्रवक्ता प्रोफेसर सरचांद सिंह ने जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दी गई धार्मिक सजा पूरी कर ली है। सरचांद सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब में अरदास कार्रवाई। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा लगाई गई सजा पूरी होने पर वह गुरु साहिबान का धन्यवाद करते हैं।
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