जनवरी में अमृतसर रेलवे स्टेशन के विकास के नाम पर उसके मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर कमल के फूल का बड़ा आकार स्थापित करने और दशकों पुराने भवन को तोड़ने की चर्चा से पैदा हुए विवाद को रेल मंत्रालय ने विराम दे दिया है। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अमृतसर रेलवे स्टेशन के प्राचीन भवन को नहीं गिराया जा रहा है। अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के लिए आने वाले लाखों यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं मिले, इस योजना पर काम किया जा रहा है।
अमृतसर रेलवे स्टेशन की मुख्य इमारत 1859 से 1862 के बीच बनी थी। इसी दौरान अमृतसर-लाहौर के बीच पहली ट्रेन चली थी। अमृतसर रेलवे स्टेशन में अधिक प्लेटफार्म का निर्माण करने के लिए इसके भवन को बहुत वर्ष पहले तोड़ा गया था। वर्तमान में अमृतसर रेलवे स्टेशन का जो भवन है, उसे किसी भी संस्था ने हैरिटेज का दर्जा नहीं दिया है। इसके बावजूद जब भी मुख्य भवन का विकास किया गया स्थानीय इतिहास व वास्तुकला का ध्यान रख कर किया गया। यही कारण है कि लोग इस भवन को धरोहर के रूप में स्वीकार करते हैं।
अमृतसर रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन आने-जाने वाली यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के लिए रेल मंत्रालय वचनबद्ध है। इस समय रेलवे स्टेशन में दिव्यांगों के लिए प्लेटफार्म में प्रवेश के लिए अनुकूल सुविधा नहीं है। इसलिए अमृतसर रेलवे स्टेशन के लिए नए भवन के निर्माण की जरूरत है। इस संबंध में आईआरएसडीसी द्वारा फिरोजपुर मंडल को एक प्रस्ताव पारित कर भेजा गया है। इस पर स्थानीय प्रशासन व पंजाब सरकार के साथ विचार-विमर्श किया गया है। इस कारण रेलवे स्टेशन पर सभी सुविधाओं को अपग्रेड करना है। भारतीय रेल ने अमृतसर रेलवे स्टेशन को पब्लिक प्राइवेट भागेदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत विकसित करने का फैसला किया है।
नए भवन का होगा निर्माण, जो प्लेटफार्म में निकासी व प्रवेश के रूप में करेगा काम
रेलमंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्टेशन के विकास के दौरान वर्तमान भवन को नहीं गिराया जा रहा है। एक अलग से नए भवन का निर्माण किया जाएगा। यह भवन प्लेटफार्म में प्रवेश, निकासी के रूप में काम करेगा।