अमृतसर के सिविल सर्जन डॉ. नवदीप सिंह के कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट होने के बाद इस वायरस के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रहे स्वास्थ्य विभाग को तगड़ा झटका लगा है। सिविल सर्जन कार्यालय तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया है और स्टाफ को घर में रहने के आदेश दिए गए हैं। शनिवार को सिविल सर्जन कार्यालय के सभी विभाग बंद रहे। सिविल सर्जन के कक्ष सहित, जिला मलेरिया अधिकारी, जिला टीकाकरण अधिकारी, सहायक सिविल सर्जन, जोनल ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी, डिप्टी डायरेक्टर डेंटल का कक्ष, एनएचएम कार्यालय, वैक्सीन स्टोर इत्यादि बंद रहे। सिर्फ जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कक्ष खुला रहा, क्योंकि कोरोना संक्रमित की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार का दायित्व जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमनदीप सिंह पर है।
सिविल सर्जन के पद पर विवाद
सिविल सर्जन डॉ. नवदीप सिंह ने कोरोना संक्रमित होने के बाद सहायक सिविल सर्जन डॉ. अमरजीत सिंह को कार्यकारी सिविल सर्जन के रूप में जिम्मेदारी सौंप दी। हालांकि इस प्रकार का निर्णय चंडीगढ़ से होता है। उन्हें जिम्मेदारी सौंपने का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। डॉ. अमरजीत से सीनियर कई अधिकारी सिविल सर्जन कार्यालय में हैं, जो डीपीसी क्लीयर कर चुके हैं और पदोन्नत होकर डिप्टी डायरेक्टर बन चुके हैं। आगामी कुछ दिनों में इन अधिकारियों को डिप्टी डायरेक्टर के रूप में किसी भी जिले का सिविल सर्जन लगाया जा सकता है। इनमें सबसे पहला नाम जिला परिवार भलाई अधिकारी डॉ. राबिंदर सिंह सेठी का है। डॉ. सेठी डीपीसी क्लीयर कर चुके हैं, जबकि सहायक सिविल सर्जन डॉ. अमरजीत सिंह उनसे काफी जूनियर हैं। जूनियर को सिविल सर्जन का जिम्मा सौंपे जाने के बाद विवाद हो रहा है। यह मामला चंडीगढ़ तक पहुंच गया है कि आखिर जूनियर को सिविल सर्जन पद का महत्वपूर्ण दायित्व क्यों सौंपा गया।
डेंगू की चपेट में सरकारी डॉक्टर, संख्या हुई पांच
कोरोना के कोहराम के बीच डेंगू मच्छर भी मंडरा रहा है। नारायणगढ़ स्थित स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक महिला डॉक्टर डेंगू पॉजिटिव पाई गई है। अब जिले में डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या पांच हो गई है। तरनतारन में 150 से अधिक डेंगू पॉजिटिव मरीज रिपोर्ट हुए, लेकिन अमृतसर में यह आंकड़ा कम इसलिए है, क्योंकि यहां शासन-प्रशासन का सारा ध्यान कोरोना पर ही केंद्रित है। कोरोना और डेंगू के लक्षण में काफी समानताएं हैं। दोनों के मरीजों को बुखार के साथ-साथ बदन दर्द की शिकायत रहती है। इसके बावजूद इन दिनों ऐसे लक्षणों वाले हर मरीज का कोविड टेस्ट ही किया जा रहा है, डेंगू टेस्ट नहीं। कोविड टेस्ट निगेटिव आने पर सभी को स्वस्थ मान लिया जाता है। इस वजह से डेंगू के मरीज रिपोर्ट ही नहीं हो पा रहे। इधर, सिविल सर्जन डॉ. नवदीप सिंह के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद एंटी लारवा विभाग भी बंद कर दिया गया है। डेंगू के इस सीजन में एंटी लारवा टीमें शहर के विभिन्न भागों में जाकर मच्छर मार दवा का छिड़काव कर रही थीं, अब इस पर भी विराम लग गया है।