जत्था 8 अक्तूबर को लाहौर से ताशकंद होते हुए उज्बेकिस्तान एयरवेज के विमान से नई दिल्ली पहुंचा था। जत्थे में 21 पुरुष, 26 महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। श्रद्धालुओं को भारत के विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने थे।
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद बंद पड़े अटारी-वाघा सीमा मार्ग से 49 सदस्यीय पाकिस्तानी सिख जत्थे ने वतन वापसी की।
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जानकारी के अनुसार, यह जत्था 8 अक्तूबर को लाहौर से ताशकंद होते हुए उज्बेकिस्तान एयरवेज के विमान से नई दिल्ली पहुंचा था। जत्थे में 21 पुरुष, 26 महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। श्रद्धालुओं को भारत के विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने थे। यात्रा पूरी होने के बाद 30 अक्तूबर को दिल्ली से ताशकंद होते हुए पाकिस्तान लौटने के लिए उन्होंने महंगी हवाई टिकटें भी बुक करवाई थीं।
हालांकि, वापसी का हवाई मार्ग बदलने के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और कमेटी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मुख्य सलाहकार परमजीत सिंह चंडोक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया।
इसके बाद मंत्रालय ने विशेष मामले के तौर पर सड़क मार्ग से वापसी की अनुमति दे दी। इससे श्रद्धालुओं को महंगे हवाई सफर के खर्च से राहत मिली है। उन्होंने अपनी वापसी की हवाई टिकटें सरेंडर कर दी हैं और रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जत्थे के नेता पपिंदर सिंह ने इस व्यवस्था के लिए भारत और पाकिस्तान सरकार के साथ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का आभार जताया है। उल्लेखनीय है कि जत्थे के करीब 40 सदस्यों को यात्रा के दौरान हेमकुंट साहिब के दर्शन करने की विशेष अनुमति भी मिली थी।