अमृतसर। भारत के किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पांच सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति द्वारा सभी बायोटैक फसलों के परीक्षण खेतों में प्रयोगों पर पाबंदी की सिफारिशों को किसान विरोधी करार देते हुए निराशा व्यक्त की है।
किसान क्लब, आल इंडिया को-आर्डिनेट कमेटी आफ फार्मर्स एसोसिएशन, फतेहाबाद किसान क्लब, नौजवान किसान क्लब एवं पूरे भारत के अन्य प्रमुख किसान संगठनों ने बायो टेक्नोलॉजी पर तकनीकी विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर चिंता व्यक्त की है।
किसान क्लब के अध्यक्ष पवितर सिंह पांगली का कहना है कि वे खेतों में उत्पादकता को लेकर कई प्रकार की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इनमें समय पर श्रमिकों की उपलब्धता, श्रमिकों पर बढ़ता खर्च, कीट, खरपतवार, फसलों के रोग, अनिश्चित जल उपलब्धता और न्यूट्रीएंट्स की उपलब्धता जैसे कई अन्य चुनौतियां शामिल हैं। बायो टेक्नोलॉजी और जीएम फसलें कुछ समाधान या विकल्प प्रदान करते हैं। पांच सदस्यों की तकनीकी समिति की सिफारिशें पूरी तरह से किसान विरोधी हैं, हमें जैव-प्रौद्योगिकी की जरूरत है। उनका कहना है कि वे कृषि के बीज चुनने का अधिकार चाहते हैं। उनका सुप्रीम कोर्ट में पूरा विश्वास है, जोकि किसानों के हित में ही कोई कदम उठाएगा।
पांगली ने कहा कि वे यह महसूस करते हैं कि समिति की सिफारिशों में हमें बीटी फसलों से मिले लाभ से उभरी सच्ची तस्वीर को नजरअंदाज किया गया है। हम महसूस करते हैं कि बायो टेक्नोलॉजी में अनुसंधान से किसानों को व्यापक लाभ होगा। अगर उन्हें यह महत्वपूर्ण तकनीक नहीं प्रदान की जाती तो उनके लिए बेहतर जीवनयापन करना मुश्किल हो जाएगा।