अमृतसर। मुंबई और कांडला पोर्ट के पास समुद्र के बीच फंसे जैइसू शिपिंग कंपनी के समुद्री जहाजों में फंसे लोगों की सकुशल वापसी और उनके बनते वेतन के भुगतान के लिए प्रधानमंत्री आफिस से जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ऑफिस ने केंद्रीय सचिव शिपिंग को पत्र लिख कर मामले पर तुरंत कार्रवाई की बात कही है।
इस मामले को पहल के आधार पर उछालने वाली संस्था अखिल भारतीय ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन को भी पीएमओ की सेक्शन आफिसर रितु शर्मा ने एक कापी भेजी है। आर्गेनाइजेशन के सेक्रेटरी जनरल हवा सिंह तंवर ने बताया कि उन्होेंने प्रधानमंत्री को 28 मई 2013 को पत्र लिख कर अवगत करवाया था कि कंपनी के कई जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। कंपनी उनमें फंसे क्रू मेंबर को न तो वापस ला रही है और न ही उनके खाने-पीने, दवा, जहाज के ईंधन की व्यवस्था कर रही है और न ही उनके वेतन का भुगतान किया जा रहा है।
तंवर ने बताया कि उनकी संस्था ने कमल-40, कमल-36, कमल-26 और कमल-33 के क्रू मेंबरों की शिकायत पर मामला उठाया था। इन जहाजों में 109 लोग फंसे हुए हैं। हालांकि मामला उठाए जाने के बाद शिकायतकर्ताओं को भेज दिया गया था, मगर बाकी के उसी स्थिति में बने हुए हैं। इसके बाद उन्होंने पीएम आफिस को शिकायत भेजी। संगठन ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस कार्रवाई से सौ से अधिक लोगों की जिंदगी बच जाएगी। उन्होंने बताया कि इन मामलों के बावजूद कमल-27 का मामला भी उनके पास आ गया है। इसमें सेंकेंड इंजीनियर पॉल एम बस ने अपील की है कि वह इस जहाज पर अपने साथियों के साथ फंसा है। दिल का मरीज होेने के कारण उसकी जिंदगी खतरे में है, उसे यहां से निकाला जाए। उन लोगों को भी बाकी जहाजों की तरह से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर राज कुमार खोसला, केएस मठारू, राजन बब्बर और सुखवंत सिंह लक्की मौजूद थे।