अमृतसर। ग्राम पंचायत ब्यास के सरपंच ने विकास के नाम पर गांव के लिए आई लाखों रुपये की ग्रांट को कथित तौर पर फर्जी खर्चों के माध्यम से खुर्दबुर्द कर दी। पंचायत ने 32 लाख 92 हजार 61 रुपये कहां खर्च किये है इसका लिखित हिसाब न तो पंचायत के पास है और न ही ब्लाक विकास अधिकारी और विभाग के पास है। वहीं गांव में खर्च 32 लाख रुपये से अधिक की राशि भी कहीं खर्च हुई नहीं दिखाई नहीं दे रही है। इस बात की जानकारी गांव में ही रहने वाले विक्रम ठाकुर ने प्रेस वार्ता में दी। उसने इस संबंध में सभी दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से ब्लाक विकास अधिकारी से हासिल किए है। यह रिकार्ड आरटीआई कमीशन की दखलअंदाजी के बाद विभाग ने ठाकुर को उपलब्ध करवाए है।
ठाकुर ने बताया कि गांव के विकास के लिए काफी फंड आया था पंचायत ने ग्रांट मिलने के बावजूद गांव को जाने वाली सड़क को नहीं बनवाया तो ग्रामीणों ने फंड के उपयोग के संबंध में पंचायत से जानकारी मांगी लेकिन पंचायत सदस्य कुछ भी बताने को तैयार नहीं थे। उन्होंने इस की सूचना आरटीआई के तहत हासिल की तो तब पता चला कि विकास का सारा पैसा हजम हो चुका है। आरटीआई के तरह ही हासिल दस्तावेजों को दिखाते हुए ठाकुर ने बताया कि पंचायत ने 6 अलग अलग बैंकों में खते खुलवाए है। पंचायत ने गांव के विकास के संबंध में कई प्रस्ताव पारित किये है। जिन के विकास का दावा किया गया है वहां कोई पैसा विकास पर खर्च ही नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वह इन दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब हाई कोर्ट में जा रहे है।