अमृतसर। दिल्ली के गुरुद्वारा रकाब गंज में अकाली दल बादल और सरना ग्रुप के सदस्यों के बीच हुई तलवारबाजी के मुद्दे पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सख्त स्टैंड लेने का फैसला कर लिया है। इस बारे में एक जांच कमेटी गठित की जा रही है। वहीं दमदमी टकसाल के मुखी बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने भी इस मामले को दिल्ली सरकार, प्रशासन और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की आपसी मिलीभगत से पैदा हुई घटना बताया है।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके पास जो शिकायतें दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के दिसंबर में होने वाले चुनावों और वीरवार को हुई घटना के संबंध में पहुंची हैं, वह काफी गंभीर हैं। समाचार पत्रों और टीवी चैनलों से जो दिखाया गया है, वह घटनाएं काफी गंभीर दिखाई देती हैं। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाएगी। इसके लिए कमेटी एक दो दिनों में गठित की जा रही है। कमेटी सीधे श्री अकाल तख्त साहिब पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी जिसके बाद ही इस मामले में से आरोपी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब में लड़ाई झगड़े और एक दूसरे की पगड़ियां उतरने की घटनाएं बहुत ही संगीन और सिख मर्यादा के खिलाफ हैं। गुरुद्वारा साहिबों में ही इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हो, इसके लिए एक जाबता और मर्यादा तैयार किए जाने पर भी विचार होगा।
दमदमी टकसाल के मुखी बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने कहा कि गुरुद्वारा रकाबगंज में अकाली दल बादल की दिल्ली शाखा के अध्यक्ष पर किया गया हमला एक योजनाबद्ध राजनीतिक साजिश है। हैरानी की बात है कि दिल्ली पुलिस ने मामले भी उनके खिलाफ ही दर्ज कर दिए जो झगड़े में घायल हुए हैं। उन्हाेंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस की मिलीभगत के तहत ही यह घटना हुई है। कांग्रेसी नेताओं ने सिखों को दो ग्रुपों में एक दूसरे के आमने-सामने करने की साजिश रची है।