राफेल स्कैम की पोल खोलेगी कांग्रेस: बाजवा
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य प्रताप बाजवा बोले
कहा, मोदी सरकार ने साबित किया कि वह चौकीदार के बजाए भागीदार है
अमर उजला ब्यूरो।
पठानकोट। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बजावा ने रविवार को कहा कि 15 दिन पहले रजिस्टर कंपनी के साथ राफेल डील कर केंद्र की मोदी सरकार ने साबित किया कि वह चौकीदार नहीं, भागीदार हैं। राफेल जेट पर खर्च किए जाने जाने पैसे भाजपा के नहीं देश के करदाताओं के हैं। बाजवा पठानकोट में कांग्रेसी कार्यकर्ता के घर मिलने पहुंचे थे।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए बाजवा ने कहा कि राफेल घोटाले को लेकर हर देशवासी के सामने मोदी सरकार की पोल खोलने के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस देश के बड़े शहरों में 100 प्रेस कांफ्रेंस करेगी, जिसमें लोगों को इस करार में मोदी सरकार के स्वार्थ और जनता के लुटाए पैसों की जानकारी दी जाएगी। बाजवा ने कांग्रेस की जिला लेवल पर गुटबाजी पर बोलने से मना कर दिया। डिफेंस के बजट में कटौती पर बाजवा ने कहा कि पहले केन्द्रीय बजट में आर्मी के लिए 2.50 फीसदी बजट का प्रावधान था। एनडीए सरकार ने इसे 1.5 फीसदी कर दिया। साथ ही आर्मी जवानों के वेतन व पेंशन तथा आर्मी के उपकरणों आदि की खरीद फरोख्त के लिए तय बजट को भी कम कर दिया है।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को भारत की जनता को इन सब बातों का जवाब देना होगा। बाजवा ने बताया कि चिदंबरम, अजय माकन, पवन खेड़ा सहित देश भर के 50 कांग्रेसी नेता बतौर स्पोक्सपर्सन इस मसले पर प्रेस कांफ्रेंस करेंगे, उनकी ड्यूटी हिमाचल और जेएंडके में लगाई है। कहा कि अप्रैल 15 को अनिल अंबानी कंपनी रजिस्टर कराते हैं और 15 दिन बाद उन्हें कांट्रेक्ट दे दिया गया। भारत सरकार के अधीन 78 साल पहले जेगुआर, सुखोई, तेजस और मिग बनाने वाली स्वदेशी एचएएल कंपनी को दरकिनार कर अनिल अंबानी की कंपनी को जहाज बनाने का कांट्रेक्ट देकर लाखों करोड़ का फायदा पहुंचाया है। अंबानी की कंपनी ने सुई तक नहीं बनाई, कोई पास्ट रिकॉर्ड नहीं। बाजवा ने कहा कि मोदी सरकार ने फ्रांस से 36 जेट की सीधी खरीद की।
एक जेट की कीमत 1670 करोड़ पड़ रही है। यूपीए के समय हुई डील में एक जेट की कीमत 526 करोड़ के करीब थी। उन्होंने मोदी सरकार पर घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि यूपीए के समय 126 जहाज की खरीद 66 हजार करोड़ में हो रही थी। एनडीए के समय मात्र 36 जहाजों की डील 60 हजार करोड़ में हुई है। अनिल अंबानी की कंपनी डूबी हुई है, इस पर बैंकों का 45 हजार करोड़ रुपये बकाया है और डूबी हुई कंपनी को इतना बड़ा कांट्रेक्ट देना ही केन्द्र की मंशा को उजागर करता है।