सिख धर्म में भेदभाव नहीं: जत्थेदार
अध्यापिकाओं ने छात्रा को दलित छात्रा को किया अपमानित
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सरकारी स्कूल गांव टोहरा में तैनात तीन सिख अध्यापिकाओं की ओर से एक दलित छात्रा को जातिसूचक शब्द कहने और उसे अपमानित करने का गंभीर नोटिस लेते हुए कहा कि सिख धर्म में भेदभाव की मनाही है। किसी को जाति के आधार पर अपमानित करना मर्यादा के खिलाफ है। बावजूद स्कूल की अध्यापिकाओं और प्रबंधकों द्वारा इस तरह का व्यवहार किया जाना गलत व शर्मनाक है।
जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए क्षेत्र के एसजीपीसी के सदस्य और गुरुद्वारा दुख निर्वाण साहिब पटियाला के मैनेजर की ड्यूटी लगाई गई है। जो इस मामले की जांच कर रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब पर सौंपेंगे। उन्होंने राज्य सरकार से संबंधित विभाग के आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि छात्रा और उसके परिवार को इंसाफ दिलवाया जाए और यह यकीनी बनाया जाए कि दोबारा इस तरह की घटना किसी अन्य विद्यार्थी के साथ न हो। उन्होंने कहा कि दलित समाज सिख धर्म का अटूट हिस्सा है। दलितों ने सिख पंथ के लिए अनेक कुर्बानियां दी है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी दलितों को रंगरेटे गुरू के बेटे कह कर नवाजा है। सिख पंथ इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगा।
श्री अकाल तख्त साहिब भेदभाव नहीं करता: जत्थेदार
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। वो इंसानियत को महत्व देता है इंसान के कर्मो को नहीं। किसी स्कूल में गुरुओं द्वारा दी जा रही बच्चों की तालीम में अगर जातिवाद व धर्म झलकता है तो वो गुरू इस काबिल नहीं। ग्रंथों में लिखा है कि गुरू, गोबिंद दोनों खड़े काहका लागों पाय, बलिहारी गुरु आपने गोबिंद दियो बताए। ऐसे में आज की शिक्षा में आधुनिकता का बसेरा है। अध्यापक गुरू नहीं बल्कि शिक्षण संस्थानों के कर्मचारी बन गए हैं जो कि समाज के लिए गलत संदेश है।