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नाटशाला में पेश नाट्क डाटर आफ बिन का हुआ मंचन

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मुस्कान देख पिघला मन, गटर में फेंक रहा था बच्ची को
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पंजाब नाटशाला में रविवार को पंजाबी नाटक डाटर आफ बिन का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। पंजाब नाटशाला में रविवार को पंजाबी नाटक डाटर आफ बिन का मंचन किया गया। कन्या भ्रूणहत्या और बेटियों के प्रति समाज की सोच को नाटक में दिखाया गया है कि एक परिवार में बेटी जन्म लेती है। वो परिवार उसे पार्क के पास रखे डस्टबिन में छोड़ जाता है। एक भिखारी उस लड़की को उठा लेता है और उसका पालन-पोषण करता है। भिखारी और उसकी लड़की जिस पार्क में बैठते हैं, उन्हें उस पार्क में पुलिस वाला बैठने और खेलने नहीं देता। वह सरेआम कहता है कि पार्क गरीबों के लिए नहीं हैं। नाटक कन्या भ्रूण हत्या, नारी सम्मान के साथ-साथ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी सहित अन्य मुद्दों पर करारी चोट करता है। नाटशाला के संस्थापक और नाटक के लेखक जतिंदर बराड़ का कहना है कि जो माता-पिता बेटियों के जन्म पर खुशी मनाने की बजाय दुखी होते हैं, उनकी सोच को बदलने के लिए ही नाटक को लिखा गया है। नाटक में बताया गया है कि भिखारी जब अपनी स्थिति के मुताबिक डस्टबिन में मिली नवजात कन्या को पाल नहीं सकता, तो उसे गटर में फेंकने का प्लान बना लेता है। जैसे ही वह गटर में उस बच्ची को गटर में फेंकने लगता है, तो बच्ची उसकी तरफ देखकर खिलखिला कर हंस पड़ती है और भिखारी का मन बदल जाने पर उसे अपना लेता है।
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नाटक में इन्होंने निभाई भूमिका
नाटक में बेबी मन्नत, सुखमनी, चांदनी, गगन, अमन अरोड़ा, गरिमा, रजिंदर चौधरी, बेबी मानसी, बेबी नयना, पवनदीप कुमार, विकास सोनू, मास्टर कुलजीत, सोनल, बेबी गिया, जरनैल सिंह, गुरकीरत संधू, सौरव कुमार, गुरपिंदर, बिक्रमजीत, जसवंत मिंटू, अशोक भगत ने नाटक में सराहनीय भूमिका निभाई है।
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