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ब्लड बैंक में बचा सौ यूनिट रक्त, रोज की खपत 50 से ज्यादा

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ब्लड बैंक में बचा सौ यूनिट रक्त
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पठानकोट।
सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ सौ यूनिट रक्त ही बचा है। वहीं सिविल अस्पताल में रोजाना 50 से अधिक यूनिट की खपत होती है। ऐसे में सिविल अस्पताल में किसी भी इमरजेंसी के समयमुसीबत खड़ी हो सकती है। वहीं जिले में डेंगू मरीजों की तादाद लगातार बढ़ने से भी रक्त में कमी आ रही है।
सिविल अस्पताल में दाखिल मरीजों को औसतन रोज 50 यूनिट से ज्यादा रक्त चढ़ जाता है। इस समय ब्लड बैंक में सिर्फ सौ यूनिट रक्त ही बचा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को रक्त की काफी आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण ब्लड बैंक में रक्त जमा नहीं हो पाता है। सिविल अस्पताल में इस समय आठ डेंगू मरीज दाखिल हैं। वहीं जिले भर में 43 डेंगू मरीज अब तक सामने आ चुके हैं।
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डेंगू स्पेशलिस्ट डॉक्टर एमएल अत्री के अनुसार सिविल अस्पताल में आठ डेंगू के मरीज दाखिल हैं। डेंगू मरीज के शरीर में रक्त सेल की कमी आ जाती है। सेल की कमी पूरी करने के लिए ताजा रक्त चाहिए होता है। ताजा रक्त की एक यूनिट से सात हजार सेल बनते हैं। मरीज के शरीर में तीस हजार सेल रह जाए तो तीन से चार बोतल रक्त चढ़ाना पड़ता है। सामान्य तौर पर तंदरुस्त व्यक्ति के शरीर में डेढ़ लाख सेल होते हैं। अस्पताल में दाखिल आठ डेंगू मरीजों के लिए रोजाना कम से कम तीन से चार यूनिट रक्त चाहिए होता है।
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डेंगू मरीजों के लिए 20 यूनिट अलग से
सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज राजविंदर ने बताया डेंगू मरीजों के लिए 20 यूनिट रक्त अलग से रखा गया है। डेंगू मरीजों में रक्त सेल की कमी पूरी करने के लिए काफी ज्यादा रक्त लगता है। डेंगू मरीजों के लिए ज्यादा देर तक रक्त सेल बचा कर नहीं रखे जा सकते। रक्त सेल अधिक से अधिक 5 दिन ही रखे जा सकते हैं। डेंगू मरीजों को ताजा रक्त से ही सेल चढ़ाए जा सकते हैं।
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