लौंगोवाल ने संभाला पद भार
- श्री दरबार साहिब में माथा टेक कार्यालय पहुंचे एसजीपीसी के नए प्रधान
- एसजीपीसी की पहली बैठक बुलाई, कमेटी पदाधिकारियों से मिले
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) का प्रधान बनने के बाद पहली बार गोबिंद सिंह लौंगोवाल मंगलवार को श्री दरबार साहिब में माथा टेकने के बाद अपने कार्यालय पहुंचे। लौंगोवाल ने कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की। इस दौरान वे कमेटी के पदाधिकारियों के साथ मिले और अलग-अलग पदाधिकारियों के कामकाज के बारे में जाना। आखिर में उन्होंने सभी को संदेश देते हुए कहा कि मर्यादा व ईमानदारी सबसे बड़ी ताकत है, यही हमें गुरुओं के बताए रास्ते पर ले जाता है।
लौंगोवाल ने दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह के तख्त श्री हरमंदिर (पटना साहिब) में प्रकाश पर्व मनाने व गुरु साहिब के बड़े व छोटे साहिबजादा की शहीदी दिवस पर पहुंचने वाली संगत के उचित प्रबंध करने के आदेश दिए। इस मौके पर एसजीपीसी के सचिव गुरबचन सिंह करमूवाला ने भी अधिकारियों को तालमेल के साथ प्रबंधकीय कामकाज निपटाने पर जोर दिया।
इस मौके पर गुरमीत सिंह तरलोकेवाला, गुरमीत सिंह बूह, भाई अजायब सिंह अभियासी, रूप सिंह, अवतार सिंह सैंपला, मंजीत सिंह, हरभजन सिंह मनावां, महिंदर सिंह आहली, सुखदेव सिंह भूरा कोहना, बलविंदर सिंह जौड़ासिंघा, केवल सिंह भूरा कोहना, दिलजीत सिंह बेदी. विजय सिंह, सुलक्खन सिंह, कुलविंदर सिंह रमदास, जगजीत सिंह जग्गी, हरजीत सिंह, लविंदप सिंह रमदास, हरजिंदर सिंह कैरोवाल, मलकीत सिंह मौजूद थे।
जग्गी बने निजी सहायक :
सरदार जगजीत सिंह जग्गी को एसजीपीसी अध्यक्ष का निजी सहायक नियुक्त किया गया। जगजीत सिंह एसजीपीसी से कई वर्षों से जुड़े हैं।
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नहीं थमा लौंगोवाल का विरोध
एसजीपीसी प्रधान बनने के साथ ही गोबिंद सिंह लौंगोवाल के खिलाफ बगावत होने लगी है। सोमवार को उनके विरोध में अजनाला में पुतला फूंका गया। वहीं कुछ एसजीपीसी सदस्यों भी अब मुखर होने लगे हैं। सुखदेव सिंह भौर ने कहा कि डेरे में वोट मांगने पहुंचने वालों में लौंगोवाल भी शामिल रहे हैं। उन्हें माफी दिलाने का काम बादल परिवार ने किया और अब उन्हें अध्यक्ष इसलिए बनाया, ताकि डेरा समर्थकों को मिला सकें। उधर, बलदेव सिंह सिरसा (सिख नेता) ने कहा कि बादल परिवार ने केवल वोट की राजनीति के चलते ही लौंगोवाल को प्रधान बनाया है। उन्हें धार्मिक सजा देने के बाद माफ करने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप ही अहम कारण है। एसजीपीसी धार्मिक संस्था है, बादल परिवार ने इस संस्था को राजनैतिक रंगत दे दी है।