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53 वर्षों से सुजान सिंह का इंतजार कर रहीं बहनों की राखियां
भारत-पाक युद्धबंदी सिपाही का परिवार चार पीढ़ियों से नहीं मना रहा राखी का त्योहार
भाई को देखने की चाहत लिए दोनों बहनों की हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर। 1965 में हुए भारत-पाक के युद्ध के दौरान पाक सेना द्वारा बंदी बनाए गए सिपाही सुजान सिंह के परिवार की पिछली चार पीढ़ियां राखी का त्योहार नहीं मना रहीं हैं। ऐसा इसलिए कि जब उनकी बहनों ने पाक की जेल में बंद अपने भाई को राखी भेजी तो वहां की सरकार ने सुजान सिंह को राखी पहुंचाने के बजाय वापस भारत भेज दी। वापस भेजी गई राखियां आज भी परिवार के पास है। सिपाही सुजान सिंह के भाई महिंदर सिंह व भाभी कौशल्या देवी ने नम आंखों से बताया कि 1965 के भारत-पाक युद्ध में सिपाही सुजान सिंह को छंबजौड़ियां के देबा बटाला सेक्टर में पाक सेना ने बंदी बना लिया था। युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद जब उनका भाई नहीं लौटा, तो अनहोनी सताने लगा। हताश सुजान सिंह की नवेली दुल्हन तारो देवी के हाथों की मेहंदी व सुर्ख चूड़े का रंग भी फीका नहीं हुआ था कि सुजान सिंह के पाकिस्तान की जेल में बंद होने की जानकारी परिवार को 1970 में उस समय मिली जब जेल से भेजा खत उन्हें मिला। इसके बाद 6 जुलाई 1970 को अमृतसर के गांव साहोवाल के दो कैदी रफीक मसीह व फकीर सिंह पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे तो उन्होंने अमृतसर में जेल सुपरिंटेंडेंट को लिखित में बताया कि भारतीय सेना की 14 फील्ड रेजिमेंट के वायरलेस आपरेटर सुजान सिंह सियालकोट (पाकिस्तान) की जेल के इंटेरोगेशन सेल में बंद है और वहां पर उस पर बेतहाशा जुल्म ढाये जा रहे हैं। इसके बाद रेडियो संदेश में खुद सुजान सिंह ने भी अपने आप को पाक जेल में बंद होने की पुष्टि की।
पाकिस्तान जेल से लौटी राखी
राखी का त्योहार आने पर जब उनकी बहनें प्रकाशो देवी व मेलो देवी ने सुजान सिंह को राखी भेजी तो वह राखी पाकिस्तान से वापस आ गई। जिससे दोनों बहनों व पूरे परिवार को गहरी ठेस पहुंची। महिंदर सिंह व कौशल्या देवी ने नम आंखों से बताया कि कुछ समय पहले भाई के गम में दोनों बहनें भी चल बसी हैं। उन्होंने कहा कि सुजान सिंह को हमसे बिछड़े बेशक 53 साल हो चुके हैं। मगर अब भी उन्हें उम्मीद है कि वह वतन जरूर लौटेंगे। परिवार की चौथी पीढ़ी शुरू हो चुकी है। लेकिन 1965 से परिवार का कोई भी सदस्य राखी का त्योहार नहीं मनाता है। परिवार के युवा व बुजुर्ग यह चाहते हैं कि यह त्योहार वह सब जंगी सिपाही सुजान सिंह की वतन वापसी पर ही उनके साथ मिलकर मनाएंगे। अगर वह नहीं लौटे तो उनका परिवार कभी भी इस त्योहार को नहीं मनाएगा।
युद्धबंदी सुजान सिंह के परिवार के जज्बे को सलाम: कुंवर विक्की
दुख सांझा करने पहुंचे शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि बदलते परिवेश में रिश्तों की गरमाहट खत्म हो रही है। इस परिवार की चार पीढ़ियां सुजान सिंह के इंतजार में राखी का त्योहार नहीं मनाती। उनके इस जज्बे को सारा देश सलाम करता है। सुजान सिंह 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध के उन 54 युद्धबंदियों में शामिल हैं, जिन पर आज भी पाकिस्तान की जेलों में जुल्म ढाए जा रहे हैं तथा यह परिवार वर्षों से उनकी रिहाई के लिए सरकार से गुहार लगा रहा है। आज भी जब वाघा बार्डर से पाक द्वारा भारतीय कैदी रिहा किए जाते हैं तो यह परिवार सुजान सिंह की तस्वीर हाथ में लिए उन कैदियों में अपने घर के चिराग को तलाशता है। मगर हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
बेटी की स्मृतियां दिल में संजोए मां भी चल बसी
पाक जेल में बंद युद्धबंदी सुजान सिंह की मां संतो देवी जिसने 25 साल तक एक टाइम खाना खाकर बेटे का बेसब्री से इंतजार करती रही और सरकार से बेटे की पेंशन भी नहीं ली। जेल में बंद बेटे की स्मृतियां दिल में संजोए वह चल बसी। सुजान सिंह का परिवार पाक में इमरान खां की नई सरकार से यह अपील करता है कि 54 युद्धबंदियों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी रिहाई करे। ताकि वतन लौटकर व अपनों से मिल सकें, जो पांच दशकों से पलके बिछाए उनके इंतजार में बैठे हैं। इस अवसर पर प्रकाश सिंह, बिमला देवी, लखविंदर सिंह, दमनप्रीत सिंह, नवदीप सिंह, मक्खन सिंह, अर्जुन सिंह, कुलदीप सिंह आदि उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन
24जीडीआर1-युद्बंदी सिपाही सुजान सिंह की वर्दी व पाकिस्तान जेल से वापिस आई राखी दिखाते उनके परिजन, साथ हैं कुंवर रविंदर विक्की।