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गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सरकार ने यह तिथियां 20 मई और 20 जून

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धान बिजाई के निर्देश मानने से किया इंकार
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किसान ने सरकार के फरमान को मनमाना और खेती विरोधी बताया
जत्थेबंदी का नाम बदलकर किसान, मजदूर संघर्ष कमेटी किया
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सूबा सरकार की तरफ से धान की फसल के लगाने के लिए तय की गई 20 जून की तिथि को किसानों ने मानने से इंकार कर दिया है। किसानों का आरोप है कि यह मनमाना फरमान है और इसका पालन किसी भी कीमत पर नहीं किया जाएगा। यह एलान किसान संघर्ष कमेटी ने किया।
रविवार को बैठक के दौरान किसानों व मजदूरों के हकों व हितों की लड़ाई लड़ने वाली किसान संघर्ष कमेटी का नाम बदल कर किसानत मजदूर संघर्ष कमेटी रखे जाने का फैसला लिया गया है। गांव चब्बा स्थित गुरुद्वारा नांगा जी में प्रांतीय कोर कमेटी के गठन के मौके पर प्रांतीय जनरल इजलास भी हुआ। इसमें 25 मेंबरी प्रांतीय कमेटी का चुनाव हुआ। कमेटी में सतनाम सिंह पन्नू को सूबा प्रधान, सरवन सिंह को महासचिव, सविंदर सिंह चुताला को वरिष्ठ उप प्रधान, गुरलाल सिंह पंडोरी रण सिंह को वित्त सचिव, जसबीर सिंह पिट्टी को उप प्रधान,सुखविंदर सिंह सभरां को संगठन सचिव, हरप्रीत सिंह सिधवां को प्रेस सचिव, गुरबचन सिंह चब्बा को ऑफिस सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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किसान नेताओं ने कहा कि सूबा सरकार ने उनकी मांगों को तो पूरा नहीं किया। अब धान की लगाई को लेकर मनमाना फरमान जारी कर दिया है। गत वर्षों में धान की पनीरी बीजने का समय 10 मई और लगाने का समय 10 जून था।गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सरकार ने यह तिथियां 20 मई और 20 जून कर दिया है। सरकार का तर्क है कि सूबे में हर साल तीन फीट भूजल नीचे जा रहा है। तिथि बढ़ाने के वक्त से बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता है, ऐसे में जमीनी पानी का दोहन रुक जाता है और किसानों के भी खर्चे कम हो जाते हैं। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार शहरी पानी के बेजा इस्तेमाल को रोकने की बजाय किसानों को निशाना बना रही है, इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। इन्होंने एलान किया है कि सभी किसान पहले की तयशुदा तिथि के मुताबिक खेती करें।
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