गुरदासपुर के सिविल अस्पताल में मंगलवार देर शाम को एक एचआईवी पॉजिटिव महिला ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन कुछ ही देर बाद नवजात की मौत हो गई। वहीं महिला की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है। महिला के पति ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि अगर डॉक्टर सावधानी बरतते तो नवजात को बचाया जा सकता था।
महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी एचआईवी पॉजिटिव है। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर वह 16 सितंबर को अपनी पत्नी को लेकर सिविल अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर ने जांच करने के बाद वापस भेज दिया और कहा कि अभी डिलीवरी का समय नहीं हुआ है।
महिला के पति ने बताया कि प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उसने अपनी पत्नी को फिर 21 सितंबर को अस्पताल में दाखिल करवाया। मंगलवार देर शाम को आपरेशन से उसकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसकी कुछ ही समय बाद मौत हो गई।
महिला के पति का कहना है कि उसने कुछ समय पहले पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाया था जिसमें बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था। वहीं डिलीवरी करवाने वाली महिला डॉक्टर का कहना था कि पेट में बच्चा सिकुड़ गया था। महिला के पति का कहना है कि डिलीवरी की तारीख आगे बढ़ाने पर यह सब हुआ है।
सिविल सर्जन से मिला एनजीओ
मामले का पता चलने पर एनजीओ उम्मीद नेटवर्क पीपल पॉजिटिव सोसाइटी के अमृतसर और गुरदासपुर अध्यक्ष तरसेम सिंह ठीकरीवाल के नेतृत्व में एक एक शिष्टमंडल सिविल सर्जन गुरदासपुर से मिला और ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल ने कहा कि एचआईवी पॉजिटिव महिला की डिलीवरी में बरती जा रही अस्पताल प्रशासन की लापरवाही निंदनीय है। अस्पताल प्रशासन ऐसे मरीजों को या तो रेफर कर देता है और या फिर अपना पल्ला झाड़ लेता है। शिष्टमंडल ने कहा कि इससे पहले भी सिविल अस्पताल गुरदासपुर में एड्स पीड़ित महिला की डिलीवरी हुई थी जिसमें अस्पताल की लापरवाही सामने आई थी। गर्भवती ने बाथरूम में ही बच्चे को जन्म दिया था। शिष्टमंडल ने सिविल सर्जन से मांग की कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई की जाए।
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
गुरदासपुर के सिविल सर्जन डॉ. विनोद बैरी ने कहा कि पूरा मामला उनके ध्यान में हैं। उनसे एक एनजीओ का शिष्टमंडल भी मिला है। मामले की उचित जांच की जाएगी।