पंजाब में पांच साल पूर्व डबवाली में भड़के डेरा-सिख विवाद की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत ने सात आरोपियों को हिंसा भड़काने का दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई। एक आरोपी की दो वर्ष पूर्व मौत हो गई थी।
18 जुलाई 2008 को डबवाली में डेरा प्रेमियों और सिखों के बीच विवाद हुआ था। इस मामले में शहर थाना पुलिस ने एसआई दलीप सिंह की शिकायत पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार सभा के तत्कालीन हलका अध्यक्ष शिवराज सिंह सहित सिख समुदाय के 10-12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने इस मामले की जांच पूरी करते हुए चालान अदालत में पेश कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत ने पुलिस द्वारा पेश सबूत और गवाहों के बयानों के आधार पर सभी सात लोगों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
इस मामले में पुलिस ने आठ लोगों की पहचान करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था। मामले में आरोपी गांव अलीका निवासी सुखमंदर उर्फ पप्पू पुत्र गुरचरण सिंह की करीब दो वर्ष पूर्व मौत हो गई थी।
यह था मामला
सिखों और डेरा सच्चा सौदा प्रेमियों के बीच उठे विवाद के कारण सिख समुदाय डेरे के नामचर्चा कार्यक्रमों का विरोध कर रहा था। इस दौरान 18 जुलाई 2008 को डबवाली में डेरा प्रेमियों ने वार्ड-12 निवासी सुंदरदास मेहता के घर पर नामचर्चा का ऐलान किया था।
जब सिखों ने वहां पहुंचकर इसका विरोध किया तो दोनों गुटों में झगड़ा हो गया। इसमें एक सिख युवक हरमंदर की मौत हो गई थी। इससे गुस्साए सिख समुदाय ने शहर में जमकर तोड़फोड़ की और डेरा प्रेमियों के घरों को निशाना बनाया था।
इस घटना में करीब 50 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था। एएसआई दलीप सिंह के बयान पर यह मामला दर्ज कर अदालत के समक्ष लाया गया था, जिस पर सोमवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने सात लोगों को सजा सुनाई। उधर, 2008 की घटना में मारे गए सिख युवक को लेकर मामला कोर्ट में अभी लंबित है।