हर देश में अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें होती ही रहती हैं। हर देश के लोग अपने जरिए देश के नाम को दुनिया के सामने लाने के लिए संघर्ष करते भी रहते हैं। ऐसा ही कुछ हो रहा है भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में।
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मैं एक दिन पाकिस्तान का नाम रोशन करूंगी
- फोटो : Dawn
जहां 8 साल से 17 वर्ष के बीच की लड़कियां अपनी मेहनत के बल पर कुछ अलग ही मुकाम हासिल करना चाहती हैं।
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दक्षिणी पाकिस्तान के कराची में आठ लड़कियां कुछ ऐसा ही कर रही है कि अपनी मेहनत के जरिए पाकिस्तान का नाम रोशन किया जा सके।
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पाकिस्तान के शाहीन बॉक्सिंग क्लब में ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। पिछले छह महीने के दौरान कुछ ऐसा हुआ है कि वहां पर सब कुछ बदला-बदला जा नजर आ रहा है।
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जब आप इस क्लब में आएंगे तो देखेंगे कि कैसे लड़कियां मुंह को हिला देने वाली और दांत को कमजोर कर देने वाली बॉक्सिंग के शानदार जैब, हुक्स और अपर कट्स की प्रेक्टिस कर रही हैं।
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इन लड़कियों को उम्मीद है कि एक दिन यह भी पाकिस्तान के लिए मेडल जीत सकेंगी।
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15 साल की उरूज कमबरानी ने कहा, "इंशाअल्लाह, मैं एक दिन अंतरर्राष्ट्रीय बॉक्सर बनूंगी...मैं एक दिन पाकिस्तान का नाम रोशन करूंगी।
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इस क्लब के संस्थापक युनूस कमबरानी ने बताया कि यहां पर हम छोटे-छोटे समूहों में लड़कियों को ट्रेनिंग देते हैं। इस क्लब की स्थापना वर्ष 1992 में हुआ था।
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उन्होंने बताया कि, "पाकिस्तान में पुरूषों और महिलाओं दोनों को अपने खेल को निखारने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यहां पर इक्विपमेंट की भी कमी है। पर धीरे-धीरे यहां पर स्थिति में सुधार हो रहा है।
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पाकिस्तान में महिलाओं को मुस्लिम समाज की दकियानूसी सोच का भी शिकार होना पड़ता है। तालिबान की धमकियां भी लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकती हैं। क्योंकि कई बार घर वाले ही लड़कियों का सपोर्ट नहीं करते हैं।
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पिछले वर्ष 2015 अक्टूबर में सिंध्ध बॉक्सिंग एसोसिएशन ने महिला बॉक्सरों के लिए कराची मे एक कैंप का आयोजन किया गया था।
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पहली बार सरकारी ने इस तरह के किसी आयोजन को अपना समर्थन दिया था।
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कमबरानी ने बताया कि बहुत अधिक संख्या में लड़कियों ट्रेनिंग लेना चाहती हैं। पर सामाजिक दबाव में वो ऐसा नहीं कर पाती है।
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पिछले साल मेरे पास एक लड़की आई उसने मुझसे पूछा, 'लड़कियों को ट्रेनिंग क्यों नहीं दी जा सकती है। उस लड़की ने कहा कि कोई भी हमें यह नहीं सिखाता है कि अपना बचाव कैसे किया जाए ?
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तब से अब तक कुछ लड़कियां लगातार टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं। घर में ही उनके ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही है।
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कोच की 17 वर्षीय लड़की अनम कमबरानी भी अपने क्लब में ट्रेनिंग ले रही है। अनम का कहना है कि, "बॉक्सिंग मेरे खून में हैं। मेरे दो अंकल इंटरनेशनल बॉक्सर है और मेरे पिता खुद मेरे कोच"।