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ऐसे सजा है करतारपुर गुरुद्वारा साहिब, इन तस्वीरों को देखकर घर बैठे करें दर्शन

Mon, 04 Nov 2019 11:16 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
पाकिस्तान में करतारपुर गुरुद्वारा साहिब को सजाया जा चुका है, इसके उद्घाटन में बस पांच दिन बाकी हैं। नौ नवंबर को उद्घाटन होगा और 10 नवंबर को भारतीय श्रद्धालु वहां जाएंगे। बता दें कि रविवार रात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतापुर परिसर की कुछ चुनिंदा तस्वीरें ट्वीट कीं।

इन तस्वीरों में गुरुद्वारा साहिब में की गई सुंदर सजावट देखी जा सकती है। तस्वीरें साझा करते हुए इमरान ने कहा कि वह गुरुनानक देव की 550वीं जयंती पर सिख श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार हैं। उन्होंने तय समय में निर्माण कार्य पूरा करने को लेकर अपनी सरकार की तारीफ कर बधाई भी दी।
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
पाकिस्तान ने यहां आने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए पासपोर्ट की शर्त समाप्त कर दी थी, केवल वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य किया गया है। भारतीयों ने यहां आने के लिए करीब दस दिन पहले पंजीकरण कराना शुरू कर दिया था। गुरुदेव नानक की 550वीं जयंती और कॉरिडोर के उद्घाटन के दिन शुल्क नहीं लिया जाएगा। अन्य दिनों में 1400 रुपए फीस लगेगी।
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, करतारपुर जाने वाले पहले जत्थे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी समेत 575 लोगों के नाम शामिल हैं। यह जानकारी पाकिस्तान की सरकार से साझा की जा चुकी है। करतारपुर कॉरिडोर पंजाब के गुरदासपुर में स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे को करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है।

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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
गुरुद्वारे के बारे में कुछ खास बातें
यह गुरुद्वारा भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गुरुद्वारा 94 साल पहले साल 1925 में बनाया गया था। करतापुर कॉरिडोर को लेकर दोनों देशों के बीच हुए समझौते के मुताबिक, रोज 5000 श्रद्धालु करतारपुर जा सकेंगे। कॉरिडोर में निर्माण कार्य की नींव साल 2018 में रखी गई थी। करीब ग्यारह महीनों में इसका काम पूरा हुआ है। कॉरिडोर की कुल लंबाई छह किलोमीटर में है, जिसमें से दो किलोमीटर का हिस्सा भारत में पड़ता है।
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
क्यों खास है करतारपुर कॉरिडोर
साल 2019 सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550वीं जयंती का वर्ष है, पाकिस्तान में मौजूद यह जगह ननकाना साहिब का जन्मस्थान है। यह पवित्र स्थान लाखों सिख श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसके खुलने से पाकिस्तान में धार्मिक पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है। बता दें कि गुरु नानक देव ने यहीं रावी नदी के किनारे स्थित दरबार साहिब गुरुद्वारे में अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे।
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
भारत-पाकिस्तान ने किया था समझौता
करतारपुर कॉरिडोर भारत के पंजाब में डेरा बाबा नानक तीर्थस्थल को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा से सिर्फ चार किलोमीटर दूर करतारपुर में दरबार साहिब से जोड़ता है। बता दें कि पाकिस्तान और भारत ने कड़ी वार्ता के बाद करतारपुर कॉरिडोर के संचालन के लिए एक एतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में पवित्र दरबार साहिब की यात्रा करने की अनुमति मिल सके। भारत और पाकिस्तान ने यह भी तय किया है कि यह गलियारा पूरे साल और सातों दिन खुला रहेगा। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को छोड़कर सामान्य तीर्थयात्री अकेले या समूह में यहां जा सकते हैं।
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
 भारत-पाक के समझौते में क्या है?
समझौते के तहत कोई भी भारतीय किसी भी धर्म या मजहब का हो, उसे इस यात्रा के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवेल ऑथराइजेशन (ईटीए) की जरूरत होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सूची करीब 10 दिन पहले पाकिस्तान को भेजेगी। हर श्रद्धालु को करीब चौदह सौ रुपये चुकाने होंगे। श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। आवेदकों को चार दिन पहले उनके आवेदन को स्वीकार किए जाने की जानकारी दी जाएगी। एक दिन में सिर्फ पांच हजार श्रद्धालु ही करतारपुर जा सकेंगे। 

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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है लेकिन इसकी भारत से दूरी महज साढ़े चार किलोमीटर है। ऐसे में श्रद्धालु दूरबीन से करतारपुर साहिब के दर्शन करते रहे हैं। यह काम बीएसएफ की निगरानी में होता रहा है।

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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
 मान्यताओं के मुताबिक, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे।

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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
 माना जाता है कि करतारपुर में इसी जगह गुरु नानक देव ने देह त्यागी थी, जिसके बाद यहां गुरुद्वारा बनाया गया।
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करतारपुर गुरुद्वारा साहिब - फोटो : Social Media
खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, करतारपुर जिस नरोवल जिले में पड़ता है वहां एजेंसियों ने आतंकी गतिविधियां देखी हैं। बीएसएफ सूत्रों का भी कहना है कि सहयोगी एजेंसियों से अनुरोध किया है कि वह इन संगठनों पर और इनपुट दें।
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