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ट्रंप के 52 निशाने के जवाब में ईरान ने गिनाए 140 ठिकाने, कहा- भूलकर भी भूल मत करना

Thu, 09 Jan 2020 03:04 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान/वाशिंगटन।

सार

  • रक्षा मंत्री हातमी ने कहा, अभी हमने छोटी दूरी की मिसाइलों का किया इस्तेमाल
  • कहा- अमेरिका ने मिसाइल हमलों की प्रतिक्रिया में नुकसान पहुंचाया तो उसके सभी ठिकानों को बनाएंगे निशना
  • खामनेई के दफ्तर के एक अधिकारी ने कहा- इससे भी कड़ा और बड़ा कदम उठाने की क्षमता रखता है ईरान
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iran-america
कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अमेरिकी जवानों या संपत्ति पर हमला करता है तो अमेरिका 52 ईरानी स्थलों को निशाना बनाएगा। इसके जवाब में अब ईरान के कुद्स फोर्स का कहना है कि उसने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के 140 ठिकानों की निशानदेही कर ली है। उसका कहना है कि अगर अमेरिका ने मिसाइल हमलों की प्रतिक्रिया में ईरान को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो वह इन सभी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

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Iran and America
ईरानी टेलीविजन के मुताबिक, सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के दफ्तर के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका को जवाब देने के कई तरीकों में अभी मिसाइल हमले का सबसे कमजोर तरीका चुना गया। ईरान इससे भी कड़ा और बड़ा कदम उठाने की क्षमता रखता है। ईरान के रक्षा मंत्री आमिर हातमी ने कहा, हमने छोटी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया। उम्मीद है कि यह अमेरिका के लिए यादगार सबक साबित होगा।
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई
2018 में ट्रंप ने जिस अल असद का किया था दौरा, वहीं हमला
2003 में सद्दाम हुसैन के तख्ता पलट के बाद अमेरिकी सेनाएं अल असद बेस पर अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। यह इराक में सबसे वायुसैनिक ठिकाना है। यहां अमेरिका और उसके गठबंधन की सहयोगी देशों की कुल 1500 सैनिक हर वक्त तैनात रहते हैं, जो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से मोर्चा ले रहे हैं। यहां नार्वे के भी 70 सैनिक तैनात हैं। 2018 में ही यहां ट्रंप ने पत्नी मेलानिया के साथ दौरा किया था।

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Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei - फोटो : Iran Press
सिर्फ सैन्य हमला काफी नहीं
सिर्फ सैन्य हमला काफी नहीं है। हमें अपने दुश्मनों को काबू में लाने के लिए तरकीब से काम लेना होगा। अमेरिका हमारा दुश्मन है और हमें दुश्मन की योजना के बारे में पता होना चाहिए। हम शक्तिशाली ताकतों के खिलाफ संघर्ष के लिए एकजुट रहे हैं। ईरान कभी कमजोर नहीं पडे़गा और न ही कभी हार मानेगा। ईरान के साथ जो हुआ हम उसको कभी नहीं भूलेंगे। - अयातुल्लाह खामनेई, सर्वोच्च नेता, ईरान (देश के नाम संबोधन में)
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Malaysia Prime Minister Mahathir bin Mohamad
मलयेशियाई पीएम ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की
मलयेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा, मुस्लिम देशों को एकजुट हो जाना चाहिए। महातिर दुनिया के सबसे बुजुर्ग प्रधानमंत्री हैं। उनकी उम्र 94 साल है। महातिर ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सभी मुस्लिम देश एकजुट हो जाएं। उन्होंने कहा कि इस्लामी देश निशाने पर लिए जा रहे हैं और असुरक्षा बढ़ रही है। मलयेशिया में 10 हजार ईरानी नागरिक रहते हैं।
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ईरान ने पहले ही अमेरिकी सेना पर मिसाइल हमले के बारे में बताया था: इराकी पीएम 
इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को दावा किया कि उसे ईरान की तरफ से एक आधिकारिक मौखिक संदेश मिला था जिसमें कहा गया था कि इराक की जमीन पर तैनात अमेरिकी सेनाओं पर मिसाइल से हमला जल्द हो सकता है। कार्यालय ने कहा कि संदेश में कहा गया था कि सुलेमानी की हत्या के जवाब में यह कदम उठाया जाएगा और यह हमला केवल अमेरिकी सेना तक ही सीमित रहेगा। हालांकि यह नहीं बताया गया था कि हमला कहां किया जाएगा। 
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