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नेपाल बाढ़ में संकटमोचक बना भारत: मंत्री बोले- हर मुश्किल घड़ी में मिला साथ, पीड़ित बोले- हमारे लिए भगवान जैसे

Wed, 02 Sep 2026 02:49 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, काठमांडू

सार

नुवाकोट में 26 अगस्त की भीषण बाढ़ के बाद ‘नेपाल-भारत मैत्री भवन’ सैकड़ों विस्थापितों का सहारा बना है। भारत के सहयोग से संचालित अस्पताल में लोगों को रहने की जगह, इलाज, दवाएं और भोजन मिल रहा है। अस्पताल ने डॉक्टरों, नर्सों और मोबाइल मेडिकल टीमों को राहत कार्य में लगाया है।
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नेपाल बाढ़ त्रासदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

नुवाकोट में बाढ़ से बचे लोगों को 'नेपाल-भारत मैत्री भवन' में एक जरूरी ठिकाना मिला है। यहां भारत के सहयोग से चल रहा एक अस्पताल, 26 अगस्त को जिले में आई भयानक बाढ़ से बेघर हुए लोगों को रहने की जगह, मेडिकल सुविधा और जरूरी मदद दे रहा है।

बाढ़ से बचे कई लोगों के लिए यह जगह सिर्फ एक अस्पताल से कहीं बढ़कर है। ऊंची जगह पर बना 'मैत्री भवन' उन सैकड़ों लोगों के लिए रहने की सुरक्षित जगह बन गया है, जिनके घर और सामान 'भोटे कोशी नदी' की बाढ़ में नुवाकोट और आस-पास के इलाकों में बर्बाद हो गए थे।

 

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अस्पताल के प्रमुख डॉ. नरेंद्र प्रसाद गिरी - फोटो : एएनआई
अस्पताल के प्रमुख ने क्या कहा? 
आयुर्वेद और वैकल्पिक चिकित्सा अस्पताल वाली इमारत को 2015 के भूकंप के बाद भारतीय दूतावास की आर्थिक मदद से फिर से बनाया गया था। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अस्पताल के प्रमुख डॉ. नरेंद्र प्रसाद गिरी ने कहा ,'अस्पताल ने उन बेघर लोगों के लिए अपने दरवाजे खोले, जिनके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं थी।
गिरी ने कहा, 'यह इमारत भूकंप के बाद दोबारा बनाई गई है। इसे बनाने में भारत के दूतावास ने आर्थिक मदद दी थी। यह इमारत लोगों के लिए एक बड़ा सहारा है। वहां से बचाए गए कई बेहाल लोगों को हम यहां लाए और उनका इलाज किया। अब उनकी सेहत स्थिर है।' 
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अस्पताल में लोगो का इलाज करते डॉक्टर - फोटो : एएनआई

अस्पताल में कितने डॉक्टर हैं? 
उन्होंने बताया कि हर रात 100 से ज्यादा विस्थापित लोग इस सुविधा केंद्र में रह रहे थे। साथ ही आस-पास के होल्डिंग सेंटरों में रह रहे लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही थी। उन्होंने कहा,'बाढ़ के बाद, लगभग छह लोग खुद हमारे पास आए थे। उन्हें मामूली चोटें आई थीं, जिनके लिए हमें टांके लगाने पड़े। एक व्यक्ति के टेंडन में भी चोट थी, जिसे हमने अगले दिन यहीं ठीक किया।'

गिरी ने बताया कि अस्पताल ने लगभग 11 डॉक्टर, पांच से सात नर्स और पांच से छह पैरामेडिक्स तैनात किए हैं। जरूरत पड़ने पर आस-पास के शेल्टरों में मोबाइल मेडिकल टीमें भी भेजी जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'अब दवाइयां काफी हैं। हमारे पास अच्छी सप्लाई है। सप्लाई चेन भी अब अच्छी हो गई है। हम सिर्फ इसी जगह तक सीमित नहीं हैं। हम मोबाइल टीमें भी भेजते हैं।' 

 

 

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मरीज - फोटो : एएनआई
मरीज ने क्या बताया? 
बाढ़ से जान बचाकर निकलने वाले लोगों के लिए यह सुविधा एक जीवन-रेखा की तरह साबित हुई है। एक मरीज ने बताया कि कैसे खाना खाते समय बाढ़ ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और अपनी बकरियों को बचाने की कोशिश में वे बह गए।उन्होंने कहा, 'मैं उस समय खाना खा रहा था। मैंने मुश्किल से खाने के दो निवाले ही लिए थे कि बाढ़ ठीक वहीं पहुंच गई।' एक जड़ को पकड़कर जान बचाने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी छोटी उंगली बुरी तरह घायल हो गई है, और आखिरकार वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
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नेपाल में बाढ़ का कहर: अपनों की तलाश में भटकते लोग, भूख-प्यास से बेहाल जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
'भारत हमारे लिए भगवान जैसा'
उन्होंने कहा, 'यहां डॉक्टरों और नर्सों ने मुझसे कहा, रोओ मत, हम तुम्हें बचा लेंगे, तुम्हारे घावों का इलाज करेंगे, दवा लगाएंगे और तुम्हें यहीं ठीक कर देंगे।' वे मेरा इलाज कर रहे हैं और मेरी मदद कर रहे हैं; मुझे अच्छी देखभाल और सुविधाएं मिल रही हैं।' 

भारत की मदद के लिए आभार जताते हुए उन्होंने कहा, 'भारत सरकार हमारे पड़ोसी देश और एक दोस्त की तरह है। नेपाल में जब यह घटना हुई, तो भारत सरकार ने हमें बहुत मदद दी है। भारत शक्तिशाली है और हमारे लिए भगवान जैसा है।' 

 
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नेपाल बाढ़ - फोटो : पीटीआई
भारत का किया शुक्रिया अदा 
एक और बचे हुए व्यक्ति, राजू थापा मगर ने कहा कि यह अस्पताल इसलिए बहुत अहम हो गया है क्योंकि जिला अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा, 'हमें इसके लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहिए। यह बहुत अच्छा काम है। ऐसे समय में अस्पताल के विकल्प सीमित होते हैं। हमारा जिला अस्पताल वहां था, लेकिन वहां जाने वाली सड़क अभी बंद है। इसलिए यह बहुत मददगार और तारीफ के काबिल काम है।' 
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नेपाल में बाढ़ के बाद रेस्क्यू अभियान जारी - फोटो : ANI
वृद्धाश्रम में रह रही महिला ने क्या बताया? 
वृद्धाश्रम में रह रहे भीमा भंडारी ने याद किया कि बाढ़ का पानी कितनी तेजी से बढ़ा और छह बुज़ुर्ग निवासियों की जान ले ली, जिन्हें समय रहते सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका। भंडारी ने कहा, 'बाद में सुरक्षाकर्मियों ने बचे हुए लोगों को बचाया और हमें इस अस्पताल में पहुंचाया। हमें यहां खाना, रहने की जगह और मेडिकल सुविधाएं मिल रही हैं।' 
उन्होंने आगे कहा, 'हम इस सुविधा के लिए भारत सरकार का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और प्रार्थना करते हैं, साथ ही हम बुज़ुर्ग निवासियों के लिए एक समर्पित घर को फिर से बनाने में लगातार समर्थन और मदद की अपील करते हैं।' 
 

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मैत्री भवन - फोटो : एएनआई
मैत्री भवन में राहत सामग्री तब दी जा रही है जब नेपाल बाढ़ के भयानक असर से जूझ रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार, मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जिसमें अकेले नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं।
इस बीच, भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत का पांचवां विमान नेपाल के लिए रवाना हो गया है, जिसमें 11 सदस्यों की एक खास बचाव टीम और 5.5 टन जरूरी दवाएं हैं। भारत ने नेपाल में बचाव कार्यों और पीड़ितों की पहचान में मदद के लिए खास बचाव और फोरेंसिक टीमें भी तैनात की हैं। 

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नेपाल में बाढ़ के बीच बांसवाड़ा प्रशासन की निगरानी बढ़ी - फोटो : अमर उजाला
नेपाल आपदा में ड्रोन कैसे काम कर रहे हैं? 
नेपाल के बाढ़ से प्रभावित पहाड़ी इलाकों में, ड्रोन अपनी पारंपरिक भूमिका,जैसे हवाई तस्वीरें लेना या मैपिंग करना, से कहीं बढ़कर एक काम कर रहे हैं। वे शवों को उनके घर तक पहुंचा रहे हैं। बुधवार को 'द काठमांडू पोस्ट' अखबार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते नुवाकोट के देवीघाट-3 से देवीघाट-5 तक ड्रोन के जरिए सात शवों को एयरलिफ्ट किया गया। यह इलाका इतना मुश्किल और खतरनाक था कि बचावकर्मी वहां सुरक्षित रूप से नहीं पहुंच सकते थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह शायद अब तक की उनकी सबसे अनोखी भूमिका थी। ड्रोन टीम में नेपाल पुलिस, नेपाल सेना और ड्रोन बनाने वाली कंपनी 'गरुड़-एक्स' (GarudX) के कर्मचारी शामिल थे।
यह अनोखा ऑपरेशन इस बात का ताजा उदाहरण है कि कैसे ड्रोन जिन्हें अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) भी कहा जाता है नेपाल में आपदा के समय मदद के लिए चुपचाप एक अतिरिक्त हाथ और आंख की तरह काम कर रहे हैं। 
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नेपाल में अचानक आई बाढ़ से छिन गया सबकुछ - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स

नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा? 
नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने बुधवार को कहा कि भारत बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों के प्रबंधन में नेपाल की मदद कर रहा है, जिसमें डीएनए टेस्टिंग और डीएनए प्रबंधन के लिए लैब बनाने में सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच करीबी रिश्ते हैं और भारत मुश्किल और अच्छे, दोनों ही समय में नेपाल के साथ खड़ा रहा है।

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