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नेपाल में नई आफत: चीख पुकार और लाशों का अंबार, जान तो बची पर दिमाग में घर कर गई बाढ़ त्रासदी की खौफनाक तस्वीर

Tue, 01 Sep 2026 02:35 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, काठमांडू

सार

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद लोगों में डर, बेचैनी और बुरे सपनों जैसी मानसिक परेशानियां सामने आ रही हैं। सरकार और संस्थाएं मनोसामाजिक सहायता, हेल्पलाइन और दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। तस्वीरों के माध्यम से देखे तबाही का मंजर। 
 
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नेपाल बाढ़ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक प्रभाव छोड़ा है जो अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है। जैसे बच्चों का बुरे सपनों से जागकर यह सोचना कि बाढ़ फिर से आ गई है। बड़ों का डर और बेचैनी से जूझना, और उफनते पानी की वजह से बिछड़े परिवारों का एक-दूसरे को खोजने की बेताब कोशिशें। 

क्या बाढ़ के बाद अब मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहा नेपाल? 
देश पिछले दस वर्षों की सबसे भयानक बाढ़ से जूझ रहा है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता एक ऐसे ट्रॉमा (मानसिक सदमे) के शुरुआती संकेत देख रहे हैं, जो चारों ओर फैली तबाही के मुकाबले कम दिखाई देता है।
मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच गई है और लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। हजारों बचे हुए लोगों में अपनों को खोने, बेघर होने और अनिश्चितता का सदमा घर कर रहा है, जिसके चलते सरकार को मानसिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया से जुड़ी अपनी कोशिशें और तेज करनी पड़ रही हैं।

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नेपाल त्रासदी में बचाव अभियान जारी। - फोटो : पीटीआई

सरकार ने इससे निपटने के लिए क्या कदम उठाया? 
आपदा के मनोवैज्ञानिक प्रभाव से निपटने के लिए, सरकार ने सबसे अधिक प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में लगभग 50 मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और मनोसामाजिक परामर्शदाताओं को तैनात किया है। मंगलवार को द काठमांडू पोस्ट अखबार ने अधिकारियों के हवाले से यह रिपोर्ट दी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बागमती प्रांत में 64 अन्य प्रशिक्षित परामर्शदाताओं को तैयार रखा गया है क्योंकि अधिकारी मनोसामाजिक सहायता की संभावित रूप से लंबे समय तक चलने वाली आवश्यकता के लिए तैयारी कर रहे हैं।

 

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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई

स्वास्थ्य सेवा विभाग की वरिष्ठ सलाहकार ने क्या कहा? 
ऐसे समय में राहत कार्य तेज किया जा रहा है जब 11,000 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। वहीं, बाढ़ से पूरी बस्तियां, घर, सड़कें और पुल नष्ट हो गए हैं। राहत कार्य में शामिल मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने कहा कि मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार (पीएफए), जिसे आम तौर पर आपदा के तत्काल चरण के बाद शुरू किया जाता है, अब सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शुरू हो रहा है।

स्वास्थ्य सेवा विभाग की वरिष्ठ सलाहकार और चिकित्सा विशेषज्ञ पोमावती थापा ने कहा कि रसुवा और नुवाकोट में तैनात 50 पेशेवरों में से लगभग 10 सीधे तौर पर पीएफए (पल्मोनरी फैसिलिटी) दे रहे हैं, जबकि चार सदस्यीय टीम को सुदूर रसुवा के उत्तरगया भेजा गया है, जो सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ क्षेत्र नहीं है।
 

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नेपाल बाढ़ - फोटो : पीटीआई

जमीनी स्थिति का आकलन कर रहे अधिकारी
उन्होंने कहा कि विभाग ने तैनाती योजना तैयार कर ली है। उन क्षेत्रों में तैनाती की व्यवस्था कर रहा है जहां सहायता की आवश्यकता है। प्रारंभिक प्रतिक्रिया पीएफए और स्वयंसेवकों को जुटाने पर केंद्रित थी, जबकि अधिकारियों ने जमीनी स्थिति का आकलन किया। थापा ने कहा कि जैसे-जैसे आपदा का पैमाना और प्रभावित समुदायों की जरूरतें साफ होती गईं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैनाती का विस्तार किया।

इस अभियान को नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी, सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड काउंसलिंग नेपाल और कई अन्य गैर सरकारी संगठनों का समर्थन मिल रहा है। सरकार ने टेलीफोन हेल्पलाइन के माध्यम से मनोसामाजिक सहायता तक पहुंच का विस्तार भी किया है।

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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई
कैसे काम करती है मनोसामाजिक सहायता? 
स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मंत्रालय के उप प्रवक्ता समीर कुमार अधिकारी ने बताया कि 1115 हॉटलाइन सामान्य स्वास्थ्य सलाह और समन्वय की सुविधा देती है। बाढ़ के बाद बढ़ी जरूरतों को देखते हुए, इस लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों को बुनियादी मनोसामाजिक सहायता देने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया है।

पाटन मेंटल हॉस्पिटल से चलाई जा रही 1166 सेवा के जरिए खास तौर पर मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध है। कॉल कहीं से भी आए, उसे यहीं भेजा जाता है और मनोसामाजिक सलाहकारों से जोड़ा जाता है। अधिकारी ने बताया कि 24 घंटे सेवा देने के लिए अभी सात सलाहकार बारी-बारी से काम करते हैं। 
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अपनों की तलाश में रोते लोग - फोटो : पीटीआई

'समस्याओं को व्यक्त करने में असमर्थ'
मंत्रालय 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन की सुविधा भी दे रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का कहना है कि अधिकांश पीड़ित अभी भी आपदा से निपटने के शुरुआती चरणों में हैं। औपचारिक परामर्श अभी मुश्किल से शुरू हुआ है।

नुवाकोट के बिदुर स्थित सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड काउंसलिंग नेपाल की चार सदस्यीय मनोसामाजिक टीम के साथ काम कर रहे मनोवैज्ञानिक गोपाल बोहरा ने कहा कि पीड़ित सदमे और संकट के साफ लक्षण दिख रहे है। बोहरा ने कहा, 'उनमें से अधिकांश इस समय सदमे में हैं और अपनी समस्याओं को व्यक्त करने में असमर्थ हैं।' उन्होंने बताया कि केंद्र में रखे गए दो बच्चे रात में बार-बार जाग जाते हैं। उन्हें बुरे सपने आते हैं। वे रोते हुए कहते हैं कि बाढ़ वापस आ गई है। बोहरा ने कहा कि बड़ों में बेचैनी, बहुत ज्यादा डर और अचानक चौंकने जैसी प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं।

 

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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई
'सुरक्षा और बुनियादी जरूरतें सबसे पहले आती है'
मनोचिकित्सक निराजन भट्टराई ने कहा कि सुरक्षा, बुनियादी जरूरतें और तालमेल ही उनकी तत्काल प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा, 'सुरक्षा और बुनियादी जरूरतें सबसे पहले आती हैं। उनकी टीम उन लोगों को आपातकालीन दवाएं दे रही है जिनका मानसिक स्वास्थ्य इलाज बाढ़ के कारण रुक गया था, जो नींद की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। जैसे ही तत्काल संकट थोड़ा स्थिर होगा, पीएफए और अन्य उपाय किए जाएंगे। 


 

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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने क्या चेतावनी दी? 
फिलहाल, ज्यादातर काम परिवारों को फिर से मिलाने बचे हुए लोगों को सेवाओं से जोड़ने और उन्हें औपचारिक काउंसलिंग के बजाय चिकित्सा सुविधा दिलाने पर केंद्रित है। भट्टराई ने कहा कि कई बड़े लोग मदद करने वालों से बातचीत करने में हिचकिचा रहे थे, जबकि बच्चे बातचीत करने के लिए ज्यादा तैयार दिखे।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि मनोवैज्ञानिक असर शायद तत्काल संकट के टलने के बाद ही ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। बोहरा ने कहा कि बचे हुए लोग न केवल डर और दुख का सामना कर रहे हैं, बल्कि अपने समुदाय के खोने का दर्द भी झेल रहे हैं।

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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई
22,000 से ज्यादा  सुरक्षाकर्मी तैनात
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के प्रवक्ता शांति महत ने कहा,' इन अभियानों के लिए नेपाल सेना के जवानों समेत 22,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक अपर त्रिशूली 1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट से 254 मजदूरों और तकनीशियनों को बचाया गया है, जबकि भारतीय और चीनी टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की मदद से खोज अभियान जारी है। 
 
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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई

इस बीच, एनडीआरआरएमए ने गोंगबु इलाके के पास बिष्णुमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है। अथॉरिटी ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। 

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