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कितनी ताकतवर है ईरानी सेना, अमेरिका से लड़ पाएगी जंग! विदेशों में ऐसे करती है ऑपरेशन

Fri, 10 Jan 2020 09:28 AM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, तेहरान
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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
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ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में हत्या करने के बाद से ही दोनों देशों में तनाव चरम पर है। ईरान ने बदले की कार्रवाई करते हुए इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई बम गिराए। हालांकि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ।

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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
इसके बाद से ही यह सवाल उठने लगे कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के खिलाफ क्या ईरान युद्ध लड़ सकता है। क्या ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जिससे वह अमेरिकी सेना को मात दे सकता है। जानिए इन सभी सवालों के जवाब:
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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
ब्रिटेन के इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फार स्ट्रैटिजिक स्टडीज के अनुसार ईरान के पास लगभग पांच लाख 23 हजार सक्रिय सैनिक हैं। इसमें ईरान की एलीट फोर्स इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के डेढ़ लाख सैन्यकर्मी भी शामिल हैं।

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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
इन सबके अलावा ईरान के पार 20 हजार की संख्या में इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के नौसैनिक ङी हैं। इनकी तैनाती होरमुज जलसंधि के आसपास की गई है। होरमुज वह जगह है जहां से दुनिया का 20 फीसदी से ज्यादा पेट्रोलियम का व्यापार होता है जबकि भारत का 60 फीसदी से ज्यादा तेल इसी रास्ते से आता है।
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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
40 साल पहले की गई थी इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स की स्थापना
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स की स्थापना 40 साल पहले की गई थी, जिसका उद्देश्य ईरान में इस्लामिक व्यवस्था का बचाव करना था। इसे ईरान का सबसे मज़बूत सैन्य संगठन माना जाता है।
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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
विदेशी जमीन पर खुफिया ऑपरेशन को ऐसे अंजाम देता है ईरान
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स ने विदेशी जमीन पर खुफिया ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए कुद्स फोर्स का गठन किया है। अमेरिकी हमले में मारे गए जनरल सुलेमानी इसी फोर्स के प्रमुख थे।
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ranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei - फोटो : Iran Press
कुद्स फोर्स सीधे ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनई को रिपोर्ट करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस फोर्स में पांच हजार सैनिक हैं।

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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
अमेरिका का आरोप है कि कुद्स फोर्स मध्य-पूर्व में उन समूहों को फंडिंग, ट्रेनिंग और हथियार मुहैया कराता है जिसे उसने आतंकी संगठन घोषित किया है। अमेरिका यह भी कहता है कि कुद्स फोर्स लेबनान के हिजबुल्लाह और फिलीस्तीन के हमास की सहायता करता है।

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ईरानी सेना - फोटो : Social Media
हमास चूंकि सुन्नी संगठन है लेकिन ईरान इसकी सहायता इसलिए करता है क्योंकि यह संगठन इस्राइल के खिलाफ लड़ता है। इसके अलावा भी कई आतंकी संगठन ऐसे हैं जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है।

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मिसाइल - फोटो : Social Media
ईरान के पास मिसाइलें
ईरान के पास कई मध्यम और कम दूरी की घातक मिसाइलें हैं। जिनमें से कई मिसाइलें इस्राइल को भी निशाना बना सकती हैं। हालांकि इसके पास कोई ऐसा हथियार नहीं है जो सीधे तौर पर अमेरिका को निशाना बना सके।

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मिसाइल - फोटो : Social media
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मध्य पूर्व में ईरान के पास सबसे ज्यादा मिसाइल हैं जो तकनीकी के मामले में अन्य पड़ोसी देशों से काफी उन्नत हैं। वर्तमान में ईरान अंतरिक्ष के लिए भी रॉकेट का परीक्षण कर रहा है।

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मिसाइल - फोटो : ANI
अमेरिका और अन्य कई देशों के साथ हुए परमाणु समझौते के बाद ईरान ने अपने लंबी दूरी के मिसाइल निर्माण को रोक दिया था। हालांकि अब समझौता टूटने के बाद वह फिर इसे बनाने में जुट गया है।

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MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन (अमेरिका) - फोटो : सोशल मीडिया
ईरान के पास शक्तिशाली ड्रोन
ईरानी सेना के पास शक्तिशाली ड्रोन भी है जो इस्राइल के एयरस्पेस को भी भेद चुके हैं। ईरान ने अपने ड्रोन का इस्तेमाल सीरिया में आईएसआईएस के आतंकियों के खिलाफ भी कर चुका है।

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ड्रोन हमला - फोटो : Social Media
2019 में जब सऊदी अरब के पेट्रोलियम कंपनी सऊदी अरामको के संयंत्र पर ड्रोन हमला हुआ था तब इसका आरोप ईरान के ऊपर लगा। लेकिन, ईरान ने इससे इनकार करते हुए इसमें यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किया गया हमला बताया।

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साइबर (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया
ईरान की साइबर शक्ति
ईरान ने 2010 में अपने परमाणु संयंत्रों पर हुए साइबर हमलों के बाद शक्तिशाली साइबर फोर्स का गठन किया है। ईरान की रिवॉल्युशनरी गार्ड के पास अपना अलग साइबर कमांड है। यह कमांड जासूसी के साथ दुश्मन देशों पर हमला भी करता है।

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साइबर हमला - फोटो : Social Media
कह जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान में ईरानी साइबर हमलावरों ने कई अमेरिकी अधिकारियों और राजनेताओं के अकाउंट में सेंध लगाया था। इसका खुलासा खुद माइक्रोसाफ्ट ने किया था।

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ईरानी सेना की टैंक - फोटो : social media
मध्यपूर्व में ईरान ऐसे बढ़ा रहा है अपना प्रभुत्व
ईरान के प्रतिद्वंदी देश जहां विदेशों से बड़ी संख्या में हथियार खरीद रहे हैं वहीं ईरान कड़े प्रतिबंधों का सामना करने के बावजूद इससे कम लागत में सफलतापूर्वक खुद हथियारों को विकसित कर रहा है। माना जाता है कि ईरान का सीरिया, लेबनान, इराक और यमन में सीधा प्रभुत्व है।

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ईरानी पनडुब्बी - फोटो : social media
ईरान खाड़ी देशों में सत्ता के समानांतर संघर्ष करने वाले विद्रोही समूहों की सहायता करता है। इससे उसने मध्य-पूर्व में अपना नेटवर्क खड़ा किया है। जिससे वह सीधे इन देशों में बिना गए मिशन को अंजाम दे सकता है।

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ईरान की तोप ब्रिगेड - फोटो : social media
अप्रैल 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स समेत कुद्स फोर्स को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। ऐसा पहली बार हुआ था जब अमेरिका ने किसी दूसरी सरकार से जुड़े सैन्य संगठन को आतंकवादी घोषित किया हो।
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