सीरिया के कथित रासायनिक हमलों के बाद अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की साझा सैन्य कार्रवाई पर रूसी विरोध को लेकर ट्रंप प्रशासन एक और बड़ा कदम उठा सकता है। सीरियाई सरकार को समर्थन देने को लेकर रूस को दंडित करने के लिए अमेरिका मास्को पर और अधिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर चुका है।
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इन प्रतिबंधों द्वारा उन कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा जिन्होंने सीरिया सरकार को ये रासायनिक हथियार मुहैया कराए हैं। अमेरिका ने कहा है कि वह सीरिया पर दबाव बनाए रखेगा और उसे रासायनिक हथियारों का प्रयोग नहीं करने देगा।
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संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने भी ऐसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की पुष्टि की है। सीरिया के रासायनिक हथियारों से जुड़ी सुविधाओं के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले हवाई हमलों के तुरंत बाद आगामी प्रतिबंध इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका सीरिया सरकार ही नहीं बल्कि उसके संरक्षक रूस और ईरान को भी जिम्मेदार मानता है।
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Tomahawk Missile
राष्ट्रपति ट्रंप ने कसम खाई है कि सीरिया का समर्थन करने वाले देशों को भी उसे रासायनिक हथियार मुहैया कराने की बड़ी कीमत चुकानी होगी और यदि उसने दोबारा रासायनिक हमला किया तो प्रतिक्रिया के लिए अमेरिका तैयार है।
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निक्की हेली ने सीबीएस के कार्यक्रम ‘फेस द नेशन’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि आप जल्द ही रूस पर लगने वाले प्रतिबंधों को देखेंगे और मंत्री स्टीव नुचिन सोमवार रात तक इसकी घोषणा करेंगे।अमेरिका की कोशिश होगी कि वह रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर दुनिया को सख्त संदेश दे।
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हेली ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद की तरफ संकेत करते हुए कहा कि हमारा मकसद असद को बाहर करना कभी भी नहीं रहा है, बल्कि हम संयुक्त राष्ट्र की अध्यक्षता में राजनीतिक प्रक्रिया द्वारा इस विवाद को सुलझाना चाहते हैं। हम युद्ध नहीं चाहते हैं।
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वहीं सीरिया हमले पर जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने समर्थन जताया है, जबकि जर्मनी के विपक्षी दलों ने हवाई हमलों पर आलोचनात्मक रुख अपनाया है। हालांकि सत्ताधारी सीडीयू, सीएसयू और एसपीडी ने मर्केल के रुख के प्रति समर्थन जताया है।
ग्रीन पार्टी ने हमलों का विरोध किया है। इसी तरह वामपंथी डी लिंके पार्टी ने भी सीरियाई हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। जर्मनी की संसद में सोमवार को सीरिया मुद्दे पर गहमागहमी का माहौल देखा गया।