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जान को खतरे में डाल रॉकेट लेकर उड़ा ‘धरती चपटी है’ कहने वाला सनकी वैज्ञानिक, दुनिया ने किया सलाम

Sun, 25 Mar 2018 05:56 PM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
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61 साल के माइक ह्यूज ने वह कर दिखाया, जिसका दावा वह किया करते थे। उन्होंने वैन में बने मोबाइल होम को रैंप बनाया और खुद के बनाए रॉकेट से शनिवार को आसमान की ओर उड़ान भरी। वह 1875 फीट की ऊंचाई तक गए। हालांकि इसके बाद उनका रॉकेट मोजावे के रेगिस्तान में क्रैश हो गया। रॉकेट क्षतिग्रस्त हो गया। शुक्र है माइक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
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खुद को वैज्ञानिक करार देने वाले कैलिफोर्निया के एमब्वाय के रहने वाले माइक को उनके शहर में लोग सनकी कहते हैं क्योंकि उनका कहना है कि धरती नारंगी की तरह गोल नहीं, चपटी है।
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वह कहते थे कि वह अपने रॉकेट से धरती को नापकर इसे साबित करके देंगे। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। कहते थे, तुम रॉकेट नहीं बना सकते। इसी जिद में माइक ने अपने इस मिशन को अंजाम दे डाला। लग्जरी लिमो के ड्राइवर और इंजीनियर रहे माइक का रॉकेट भाप से संचालित होता है।
 
 

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लॉस एजेंलिस से 321 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित रेगिस्तान से रॉकेट लांच करने वाले माइक ने बताया कि वह नवंबर में ही यह लांच होने वाला था। पर भूमि प्रबंधन और तकनीकी समस्याओं के चलते यह टल रहा था। 

 
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शनिवार को भी काफी दिक्कतें आ रही थीं। हवा तेज थी और रॉकेट को पर्याप्त भाप भी नहीं मिल पा रही थी। पर तीन बजे बिना किसी काउनडाउन के माइक ने राकेट उड़ा दिया। जब उन्होंने राकेट से पैराशूट के जरिये छलांग मारी तो यह 563 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच चुका था। 

 
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माइक बेहद धमाके के साथ जमीन पर गिरे, लेकिन उन्हें चोट नहीं लगी है। रॉकेट का अगला हिस्सा भी पूर्व योजना के अनुसार दो हिस्से में बंट गया और लांच की जगह से डेढ़ हजार फीट की दूरी पर गिरा। 

 
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लैंड होने के बाद पैरामेडिक की टीम ने जब माइक को रॉकेट से निकाला तो उन्होंने कहा, अब मुझे राहत मिली। मैं उन लोगों से थक गया था, जो कहते थे कि मैं रॉकेट नहीं बना सकता। मैंने महीनों मेहनत कर रॉकेट बनाया और मिशन पूरा किया। 

 
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पहले भी की थी कोशिश: 30 जनवरी, 2014 को एरिजोना में भी माइक ने यूं ही उड़ान भरी थी। तब वह 1374 फीट की ऊंचाई तक गए थे और लैंड होते वक्त एक इमारत पर गिर पड़े थे। 
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