उत्तराखंड में गढ़वाल के प्रसिद्ध व्यंजनों का स्वाद आपको सगाई, शादी और बर्थ-डे पार्टियों में भी मिले इसके लिए गढ़वाल की दो महिलाएं आगे आई हैं। नौकरी छोड़कर स्वरोजगार की तरफ बढ़ी महिलाओं ने गढ़वाली रसोई ‘रस्यांण’ शुरू की है।
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गढ़वाली टिफिन सेवा
ढाई से तीन सौ रुपये की प्लेट में अधिकतर गढ़वाली व्यंजन परोसती हैं। इन दिनों परेड ग्राउंड में इनकी रस्यांण सजी हुई है। इंटीरियर डिजाइनर अर्चना ग्वाड़ी रतूड़ी और एमबीए कर चुकी स्वाति डोभाल ने ‘रस्यांण’ कुछ समय पहले ही शुरू की है। इन्होंने जॉब भी की लेकिन दिल्ली में हुए निर्भया रेप कांड के बाद वह पूरी तरह से हिल गईं।
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गढ़वाली टिफिन सेवा
अर्चना ने बताया कि तब तक उसकी मुलाकात स्वाति से नहीं हुई थी। इस घटना के बाद उन्होंने समाज के लिए कुछ करने की सोची। इसके लिए वह धाद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पहुंचीं। जहां स्वाति से उनके विचार मिले। दोनों एक-एक साल युवा धाद के अध्यक्ष रहे। अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया और पांच महिलाओं को साथ लेकर टिफिन सर्विस शुरू कर दी। इसके लिए जोगीवाला में किराए का कमरा लिया।
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गढ़वाली टिफिन सेवा
महिलाएं खाना बनाती हैं और वो दोनों स्कूटी पर टिफिन घर-बाजार सभी जगह देने जाती हैं। इसके बाद इन्होंने गढ़वाली व्यंजनों के प्रचार-प्रसार के बारे में सोचा। स्वाति ने बताया कि उन्होंने शादी, सगाई और बर्थडे पार्टी के लिए गढ़वाली व्यंजनों की बुकिंग लेनी शुरू की। डेढ़ महीने में वह पांच बड़े आयोजन कर चुकी हैं। इसमें उन्हें बहुत अच्छा रिस्पांस मिला।
बताया कि ऐसे आयोजनों के लिए टिहरी से दो हलवाई और एक बर्तन धोने वाला बुलवाते हैं। परेड ग्राउंड में लगे ट्रेड फेयर में भी दोनों ने अपनी रस्यांण सजाई है। पहली बार में ही यहां इन्हें बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। थाली में यह रहते हैं गढ़वाली व्यंजनः कोदे की रोटी, झंगोरे की खीर, चैंसा, गहत की दाल, कद्दू का हलवा।