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पहाड़ों में कुदरत की मेहरबानी: बर्फबारी के बाद चांदी की तरह चमके पहाड़, पड़ने लगी कड़ाके की ठंड; तस्वीरें

Tue, 10 Dec 2024 12:43 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ जिले के विभिन्न हिस्सों में झमाझम बारिश तो धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्रों और मुनस्यारी में मौसम का पहला हिमपात हुआ। बारिश और बर्फबारी से जिले का तापमान लुढ़क गया जिससे कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है।
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पिथौरागढ़ में बर्फबारी के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला

 

पिथौरागढ़ जिले में मौसम ने अचानक करवट बदली। जिले के विभिन्न हिस्सों में झमाझम बारिश तो धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्रों और मुनस्यारी में मौसम का पहला हिमपात हुआ। बारिश और बर्फबारी से जिले का तापमान लुढ़क गया जिससे कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है।

जिला मुख्यालय में न्यूनतम तापमान तीन तो मुनस्यारी में माइनस-एक डिग्री पहुंच गया है। चीन सीमा से सटे दारमा, चौदास और व्यास घाटी के साथ हिमनगरी मुनस्यारी ने बर्फ की सफेद चादर बिछी है। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटक भी खुश हैं। वहीं काले पड़ी हिमालय शृंखलाओं ने भी फिर से बर्फ की सफेद चादर ओढ़ी है इससे मौसम विज्ञानी और पर्यावरण प्रेमियों के चेहरे पर खुशी है।

सोमवार सुबह मौसम का मिजाज बदल गया। जिला मुख्यालय के साथ ही कनालीछीना, देवलथल, तेजम, अस्कोट आदि स्थानों पर बारिश तो धारचूला में चीन सीमा से सटे दारमा, चौदास, व्यास घाटी के अलावा मुनस्यारी में बर्फबारी हुई। धारचूला की घाटियों में एक फुट तो मुनस्यारी में छह इंच बर्फ गिरी।

जिला मुख्यालय के नजदीक चंडाक, थलकेदार और कनालीछीना में ध्वज की पहाड़ी पर हल्की बर्फबारी हुई इसका असर जिला मुख्यालय सहित आसपास के इलाकों में रहा। बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान गिर गया। जिला मुख्यालय में न्यूनतम तापमान तीन, दारमा, व्यास, चौदास घाटियों में माइनस-दो तो मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान माइनस-एक डिग्री रिकार्ड किया गया। पारा लुढ़कने से जिले भर में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है।

पूरे दिन शीतलहर चलती रही और लोगों को ठंड से बचने के लिए हीटर, ब्लोवर और आग का सहारा लेना पड़ा। ठिठुरन बढ़ने से लोग घरों में दुबके रहे और बाजारों में रौनक कम रही। नाचनी क्षेत्र में बारिश से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। लंबे समय से सूखे जैसे हालात होने से किसान फसलों के उत्पादन को लेकर चिंतित थे। किसानों को इस बारिश से फसलों में सुधार की उम्मीद है।

 

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बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला

दारमा, व्यास, चौदास में जम गए जल स्रोत
धारचूला के दारमा, व्यास और चौदास घाटी में सीजन के पहले हिमपात ने दिक्कत बढ़ा दी है। पहली बर्फबारी के बाद यहां का तापमान माइनस-तीन डिग्री पहुंचने से प्राकृतिक जल स्रोत जम गए हैं और जलापूर्ति ठप हो गई है। ढाकर, विदांग, दावे, गर्ब्यांग, गुंजी, कालापानी, नाभीढांग, ज्योलिकांग आदि पोस्टों में तैनात सेना और आईटीबीपी के जवान, होम स्टे संचालकों के साथ ही स्थानीय लोग बर्फ पिघलाकर अपनी जरूरत पूरा करने के लिए मजबूर हैं। दांतू के होम स्टे संचालक गुड्डू जंग ने बताया कि जल स्रोत जमने से सैनिकों और स्थानीय लोगों की दिक्कत बढ़ गई है।

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मुनस्यारी में बर्फबारी के बीच स्कूल जातीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

बर्फबारी देख खुशी से झूमे पर्यटक
धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्रों और मुनस्यारी में बर्फबारी पर्यटक खुश हैं। मुनस्यारी में पर्यटकों ने बर्फबारी का जमकर लुत्फ उठाया। बच्चों ने भी बर्फबारी के बीच जमकर धमाल मचाया। बर्फ से बच्चे कई कलाकृतियां बनाते नजर आए। वहीं दांतू के होम स्टे संचालक गुड्डू जंग ने बताया कि बाइक से दिल्ली, मुंबई और पिथौरागढ़ के 14 पर्यटकों की टीम बीते रविवार को पंचाचूली ग्लेशियर के दीदार करने पहुंची। रात से ही बर्फबारी होने से सभी खुशी से झूम उठे। सोमवार को बर्फबारी का आनंद लेकर सभी पर्यटक वापस लौटे। वहीं बर्फबारी के बाद मुनस्यारी में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। 

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बर्फबारी के बीच बच्चे - फोटो : अमर उजाला

थल-मुनस्यारी सड़क बंद, पर्यटक परेशान
पहली बर्फबारी में ही हिमनगरी को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों का साथ छोड़ दिया। कालामुनी में बर्फबारी के बाद सड़क बंद हो गई इससे कई वाहन फंसे रहे। वाहन चालकों, पर्यटकों और अन्य यात्रियों को माइनस-एक डिग्री में वाहनों में बैठकर सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा।

सोमवार को बर्फबारी के बाद थल-मुनस्यारी सड़क कालामुनी के पास बंद हो गई। सड़क पर बर्फ की चादर बिछने से वाहनों के पहिए थम गए। फिसलन होने से वाहन बीच सड़क पर खड़े हो गए और चालकों, पर्यटकों और अन्य यात्रियों को कड़ाके की ठंड के बीच वाहनों में समय बिताना पड़ा।

मुनस्यारी से थल, अल्मोड़ा, हल्द्वानी जाने वाले वाहनों को वाया मदकोट आवाजाही करनी पड़ी। ऐसे में उन्हें 10 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ा। दोपहर बाद मौसम का साथ मिला और बर्फबारी थमी। सड़क पर बिछी बर्फ पिघलने के बाद सड़क पर आवाजाही शुरू हुई तो सभी ने राहत की सांस ली।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने बताया कि देर शाम थल-मुनस्यारी सड़क पर आवाजाही शुरू हो गई। उधर बोगडियार में मिलम के लिए बन रही सड़क के निर्माण में लगे बीआरओ के मजदूरों को भी कड़ाके की ठंड के बीच रहना पड़ रहा है।

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बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला

बारिश से किसानों के चेहरे खिले
जिला मुख्यालय सहित बंगापानी, कनालीछीना सहित अन्य हिस्सों में बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे। बारिश न होने से खेतों में नमी कम हो गई थी और इनमें उगी जौ, गेहूं, सरसों, मसूर सहित अन्य फसलों की पौध सूखने लगी थी। बारिश से पौध को नई जान मिली है इससे किसान खुश हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यह बारिश फसलों और बागवानी के लिए लाभदायक है। 

ठंड बढ़ी तो भेड़पालक प्रवास पर तराई की तरफ रवाना
थल में ठंड बढ़ी तो भेड़पालक भेड़ों के साथ प्रवास पर तराई की तरफ रुख करने लगे हैं। सोमवार सुबह थल पहुंचे भेड़ पालक महेंद्र सिंह बृजवाल ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने से प्रवास पर हल्द्वानी जाएंगे। भेड़ों, घोड़ों के साथ एक दिन में अधिकतम 15 किमी ही यात्रा संभव है। कहा अगले तीन महीने तक ठंड से बचने के लिए प्रवास पर रहेंगे। 

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