22 मार्च यानी विश्व जल दिवस। जल बचाने के संकल्प का दिन। जल के महत्व को जानने का दिन और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन। इस अवसर पर वाराणसी के तुलसी घाट पर मानव श्रृंखला बनाकर गंगा को अविरल निर्मल बनाने का संकल्प लिया गया। संकटमोचन फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से बुधवार को तुलसी घाट पर मानव श्रृंखला बनाकर गंगा को अविरल निर्मल बनाने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे ने कहा कि गंगा हमारी सभ्यता और संस्कृति की संरक्षिका है। इसको हर हाल में बचाना होगा।
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साध्वी गीतांबा तीर्थ ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए संत समाज पूरा सहयोग देगा। आईआईटी, बीएचयू के पूर्व निदेशक एवं संस्था के निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय ने कहा कि स्व. वीरभद्र मिश्र ने गंगा की अविरलता के लिए संस्था की स्थापना की थी।
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कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव और रोहनिया विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। महापौर रामगोपाल मोहले ने कहा कि गंगा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं गंभीर हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से इस काम में तेजी आएगी।
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फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि अब तो केंद्र और प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकारें हैं। वर्तमान सरकार के समक्ष प्रदूषण रोकना और गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाना चुनौती होगी।
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रंगकर्मी राजकुमार के निर्देश पर स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। मानव श्रृंखला बनाने वालों में तुलसी विद्या निकेतन, नंदलाल बाजोरिया संस्कृति विद्यालय, वेदांत कोचिंग सेंटर सहित कई स्कूल के बच्चे शामिल थे।
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'विश्व जल दिवस' मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1992 के अपने अधिवेशन में 22 मार्च को की थी। 'विश्व जल दिवस' की अंतरराष्ट्रीय पहल 'रियो डि जेनेरियो' में 1992 में आयोजित 'पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' (यूएनसीईडी) में की गई थी।
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सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में 'जल दिवस' के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।
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विश्व जल दिवस पर ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाए गए। पीएम के आदर्श गांव नागेपुर में ग्रामीणों ने मेहंदीगंज स्थित शीतल पेय कंपनी के प्लांट पर जलदोहन का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
चौबेपुर और आराजीलाइन क्षेत्र में हुए कार्यक्रमों में जल संरक्षण के लिए सरकार से विशेष अभियान चलाने की अपील की गई।
नागेपुर में ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि शीतल पेय कंपनी अत्यधिक भूजल दोहन कर रही है। इससे क्षेत्र में भूजल का स्तर गिर गया है और जल संकट उत्पन्न होने लगा है।