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पूरी हुई आसः बनारस के सॉफ्ट स्टोन क्राफ्ट और गाजीपुर की वाल हैंगिंग को मिला जीआई टैग

Tue, 17 Apr 2018 12:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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craft - फोटो : अमर उजाला
हस्तकला और उत्कृष्ट कारीगरी के लिए बनारस सहित पूर्वांचल का दबदबा बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी के सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क और गाजीपुर के वाल हैंगिंग को देश के बौद्धिक संपदा अधिकार में शामिल कर लिया गया है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..


 
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craft - फोटो : अमर उजाला

जीआई विशेषज्ञ और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के निदेशक डॉ. रजनीकांत ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से सॉफ्ट स्टोन के लिए स्थानीय शिल्पियों की संस्था दी बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी रामनगर व बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव सोसाइटी और गाजीपुर की वाल हैंगिंग के लिए निशा क्राफ्ट विकास समिति सैदपुर ने 18 जुलाई, 2016 को जीआई रजिस्ट्री चेन्नई में दाखिल किया था। 


 
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ghazipur - फोटो : अमर उजाला
20 महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद दोनों को जीआई उत्पाद का दर्जा मिल गया है। इसके चलते आने वाले समय में दोनों शिल्पों के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार से विशेष सहयोगा मिलेगा। इन दोनों शिल्प की नकल पूरी दुनिया में नहीं की जा सकेगी और निर्यात बढ़ जाएगा।
 

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craft - फोटो : अमर उजाला
इसी वर्ष 12 मार्च को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को दीनदयाल हस्तकला संकुल में प्रधानमंत्री मोदी ने हाथी के अंदर हाथी को दिखाया था। यह सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का था। इसी दौरान फ्रांस के एफिल टॉवर को गाजीपुर की वाल हैंगिंग पर बनाकर प्रदर्शित किया गया था। 
 
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craft - फोटो : अमर उजाला
सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क के वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर व सोनभद्र को और गाजीपुर वॉल हैंगिंग के लिए गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली व मिर्जापुर जनपद को ही कानूनी रूप से दोनों उत्पादों को बनाने के लिए जीआई रजिस्ट्री द्वारा अधिकृत किया गया है।
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