मानसून सक्रिय होने के बाद थोड़ी सी बारिश में ही वाराणसी नगर निगम के इंतजाम धुल गए हैं। एक ओर योगी सरकार ने 15 जून तक गड्ढे भरवाने का आदेश दिया थो तो दूसरी ओर मानसून की पहली बारिश के साथ ही सड़कों पर नए गड्ढे बनने लगे हैं। खोद कर जगह-जगह छोड़ी गई सड़कों की राह दुश्वारियों से भर गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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rai in varanaso
- फोटो : अमर उजाला
कीचड़ से सराबोर सड़कों पर लोग कहीं पैदल तो कहीं वाहनों से फिसल कर गिरने लगे हैं। शहर वासियों की मुश्किलें बढ़ गई है। कई इलाकों में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के चलते जगह-जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई तो वहीं औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें भी पानी में डूबी नजर आ रही है।
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मंगलवार दोपहर में शुरू हुई बारिश के चलते सड़कें कीचड़ से सराबोर हो गईं। दोपहिया वाहनों को लेकर कुछ इलाकों में गुजरना मुश्किल हो गया। ज्यादा दयनीय स्थिति उन क्षेत्रों की थी जहां विकास कार्य चल रहे हैं। कैंट और मंडुवाडीह में बन रहे फ्लाईओवर के आसपास इस कदर कीचड़ हो गया था कि कई लोग इसकी वजह से फिसल कर गिर गए।
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बारिश के साथ ही शहर की सड़कें भी धंसने लगी हैं। जिन इलाकों में खुदाई का काम हुआ था वहां पाटी गई सड़कों की मिट्टी दबने लगी हैं। इसके चलते छोटे और बड़े गड्ढे हो रहे हैं। चौकाघाट पुल के बाद बड़ा गड्ढा होने से वाहनों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। इसी प्रकार डीरेका के पास भी कई छोटे बड़े गड्ढे हो गए हैं। बारिश में इनमें पानी भरने के कारण कई राहगीर चोटिल हो रहे हैं।
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वहीं नगर निगम के पास पटरियों पर भी जल-जमाव दिखा। इंग्लिशिया लाइन चौराहे से कैंट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी जगह-जगह जलजमाव होने की वजह से आम जन को आने जाने में दिक्कत पैदा हो रही थी। अंधरापुल के समीप निर्माण कार्य के चलते सड़क की पटरियों पर जल एकत्रित हो गया था।
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बीएचयू में भी बारिश के चलते जगह-जगह जलजमाव की स्थिति रही। शहर में जिन क्षेत्रों में कूड़ा नहीं उठ पाया था वहां बारिश के चलते सड़कों पर फैल गया। आवाजाही में लोग परेशान होने लगे। साकेतनगर में भी जलभराव के चलते लोगों को फजीहतें उठानी पड़ीं।
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कैंट रेलवे स्टेशन की कॉलोनियों में भी सड़कों पर जलभराव की स्थिति रही। प्रमुख मार्गों पर कम शहर के मुहल्लों और गलियों में जलजमाव और फिसलन की समस्या गंभीर रही। इंडस्ट्रियल एरिया चांदपुर में हल्की बारिश से ही स्थिति गंभीर हो गई। सड़कों पर पानी लग गया। उद्यमियों का कहना है कि कहीं जोर की बारिश हुई तो फिर से प्रोडक्शन ठप होने की स्थिति आ सकती है।
सबसे अधिक खतरा उन इलाकों में है जहां विकास एवं निर्माण कार्य के नाम पर खुदाई की गई थी। गिट्टी और मिट्टी डालकर खोदी गई सड़कों को तो पाट दिया गया है लेकिन बारिश में मिटटी के दबने से गड्ढे बनने का खतरा मंडरा रहा है। इनमें अधिकतर अस्सी से राजघाट के बीच का इलाका है।