मोक्ष नगरी नगरी काशी में हर कुंड का अपना इतिहास और महत्व है। इन्हीं में से एक चेतगंज थाने के पास कुंड पिशाच मोचन भी है। इस कुंड की महत्ता तो वैसे हमेशा रहती है लेकिन पितृपक्ष में इसका महत्व और बढ़ जाता है। भारत में सिर्फ पिशाच मोचन कुंड पर ही त्रिपिंडी श्राद्ध होता है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है। मान्यता के अनुसार तो काशी में जिसकी भी मौत होती हो उसे मोक्ष मिल जाता है, लेकिन इस कुंड पर अकाल मौत या अन्य अन्य किसी वजह से भटकती आत्माओं को मोक्ष मिलता है। यही वजह है कि यहां देश भर से लोग आते हैं और तर्पण करते हैं।
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भारत में सिर्फ पिशाच मोचन कुंड पर ही त्रिपिंडी श्राद्ध होता है, जो पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु की बाधाओं से मुक्ति दिलाता है। इस कुंड का बखान गरुड़ पुराण में भी किया गया है। काशी खंड की मान्यता के अनुसार पिशाच मोचन मोक्ष तीर्थ स्थल की उत्पत्ति गंगा के धरती पर आने से भी पहले से है।
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मान्यता के अनुसार यहां स्थित पीपल के वृक्ष पर भटकती आत्माओं को बैठाया जाता है। इस दौरान पेड़ पर सिक्का रखवाया जाता है ताकि पितरों का सभी उधार चुकता हो जाए और पितर सभी बाधाओं से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकें और यजमान भी पितृ ऋण से मुक्ति पा सके।
पितृपक्ष की प्रतिपदा यानी मंगलवार को बड़े पैमाने पर तर्पण किया जाएगा। इसके लिए पिशाच मोचन और गंगा के घाटों पर भोर से ही पिंडदान करने वालों की भीड़ जुट जाएगी। वहीं जो लोग गया श्राद्ध करने जाते हैं वह भी काशी में पिंडदान करते हैं। पिंडदान करने का सिलसिला तो सोमवार से ही शुरू हो गया है।