अपने अनेक नामों से जानी जाने वाली वाराणसी दुनिया की प्राचीनतम नगरियों में से एक है। धार्मिक महत्ता के साथ-साथ वारणसी अपने प्राचीनतम एवं मनोरम घाटों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। आज आपको कुछ गंगा घाट की विशेष तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं जिन्हें देख कर आप की आंखे धोखा खा जाएंगी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
यूं तो काशी का नाम ही देश-दुनिया के लिए बड़ा आकर्षण है लेकिन इस प्राचीनतम शहर की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत और कला को थ्रीडी तकनीक के सहारे जिस खूबसूरती से यहां प्रदर्शित किया गया है उसे देखकर बरबस ही नजरें ठहर जाती हैं। एकबारगी तो यकीन नहीं होता कि दीवारों पर तस्वीर देख रहे हैं या गंगा किनारे खड़े होकर सचमुच के घाट। जी हां, हम बात कर रहे हैं वाराणसी के बड़ा लालपुर स्थित पं. दीनदयाल हस्तकला संकुल की। इसे ट्रेड फैसिलिटी सेंटर के नाम से भी जाना जाता है।
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काशी के घाट, यहां की सर्पीली गलियां और बनारसी जीवन शैली सब कुछ इस तरीके से दीवारों पर प्रदर्शित किए गए हैं कि हर जगह जीवंतता झलकती है। यहां थ्रीडी इफेक्ट के चलते काशी के घाट, गलियों का जीवन, खान-पान के स्टॉल सब बिलकुल जीवंत हैं। यहां ऐसा बहुत कुछ देखने को है जिसकी उन्हें कल्पना तक न होगी और यह अहसास उन्हें अनोखेपन का एहसास कराएगा। हस्तकला संकुल के संग्रहालय में डिजिटल स्केच दशाश्वमेध सहित तमाम घाटों को प्रदर्शित किया गया है।
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पूजन सामग्री और पान की दुकान तो ऐसे नजर आते हैं कि दर्शकों के हाथ बरबस ही पान उठाने के लिए बढ़ उठते हैं। थ्रीडी इफेक्ट से तैयार डिजिटल स्केच में गंगा की मौजों पर तैरती नौकाएं और लहरों पर क्रीड़ा करते पक्षी आकर्षित करते हैं। ऐसा अहसास होता है कि यह सब कुछ आंखों के सामने ही घटित हो रहा है। बीते 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सेंटर का लोकार्पण किया था।
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यही नहीं, पहली बार काशी देखने आए ऐसे सैलानी जो अपने सफर की शुरुआत हस्तकला संकुल से कर रहे हैं, उनमें घाटों के डिजिटल दर्शन के बाद प्राचीन घाटों को देखने की ललक और बढ़ जा रही है। डिजिटल स्केच में घाट, गंगा आरती, बनारसी पान, घाट का जीवन, बुनकरी, शिल्प आदि को बखूबी उकेरा गया है।
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नोएडा की पवेलियन एंड इंटीरियर्स को संकुल के आंतरिक साज-सज्जा की जिम्मेदारी दी गई थी। डिजिटल काशी के दर्शन कराने के लिए एजेंसी को डेढ़ महीने का समय लगा। एजेंसी के निदेशक मैथ्यूज बेंजमिन ने बताया कि पहले काशी के घाट, गलियों, शिल्प आदि के हजारों फोटो खींचे गए। इसके बाद इन्हे थ्रीडी सॉफ्टवेयर के जरिए डेवलप किया गया।
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फिर डिजिटल स्केचिंग के माध्यम से एक फोटो को कई भागों में बांटकर, बृहद आकार में विकसित किया गया। फिर पूरी टीम ने चार्ट पेपरनुमा डिजिटल फिल्म को दीवारों पर बेहद सावधानी से जोड़-जोड़कर लगाया। कई डिजिटल फिल्माें से थ्रीडी इफेक्ट वाले घाट तैयार हुए।
घाटों के समीप डिजिटल डिस्प्ले भी रखे गए हैं। जो एक क्लिक पर काशी के घाट और कला से जुड़े इतिहास और भूगोल की सारी जानकारी दे रहे हैं। हिंदी और अंग्रेजी में कोई भी इसकी जानकारी प्राप्त कर सकता है। यहां घाट और शिल्प से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री भी दर्शकों को दिखाई जाती है।