काशी की बेटियां दूसरे की ताकत से खुद को मजबूत करने में जुटी हुई हैं। मार्शल आर्ट्स की विधा अकीडो से सामने वाले की ताकत का इस्तेमाल उसके खिलाफ ही किया जा सकता है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
कराटे से अलग यह विधा स्प्रिचुअल पावर का इस्तेमाल कर सामने वाले को पटखनी देने में बहुत मददगार साबित हो सकती है। लड़कियों को कमांडो एकेडमी ऑफ मार्शल आर्टस की ओर से अकीडो के प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है।
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संस्था के अखिलेश रावत ने बताया कि आजकल छेड़खानी की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और ऐसे में बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। लड़कियां घर से बाहर अकेले निकलने से डरती हैं। इसलिए हर मां बाप अपनी बच्चियों को पूरी तरह से प्रशिक्षित करना चाहते हैं।
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मास्टर ट्रेनर अजीत कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह विधा कराटे से बिल्कुल भिन्न है क्योंकि इसमें अपनी ताकत का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती है। सामने वाले की ताकत इस्तेमाल कर वह उसे पटखनी देने का काम करती हैं। इसलिए लड़कियां कराटे और जूडो को छोड़कर अब इस विधा की ट्रेनिंग ले रही हैं। फाइटिंग के साथ योगा का समन्वय आपको बहुत मजबूत बनाता है।
लड़कियों को अकीडो की ट्रेनिंग देकर 2020 तक शक्ति सेना तैयार करना चाहते हैं। इस शक्ति सेना का उद्देश्य लड़कियों को मजबूत और सशक्त बनाना है ताकि वह किसी भी परिस्थिति का डटकर सामना कर सकें। वाराणसी ही नहीं पूर्वांचल के कई अन्य जिलों की लड़कियों को इस विधा की ट्रेनिंग देने का काम भी हम सभी कर रहे हैं।