यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार नकल पर हुई कड़ाई और सीसीटीवी कैमरे की नजर में कराई गई परीक्षा का असर ये रहा है कि नकल माफियाओं वाले जिले शीर्ष से धरातल पर आ गए हैं। बीते साल सूबे के 75 जिलों में पूर्वांचल के मई, बलिया और आजमगढ़ ने पासिंग प्रतिशत में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान पाकर हैट्रिक लगाई थी लेकिन इस बार ये तीनों ही जिले 50वें पायदान के भी नीचे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में इस साल सोनभद्र और वाराणसी जिले ने पूर्वांचल में कमाल कर दिखाया है। इंटरमीडिएट में जहां सोनभद्र पहले पायदान पर है, वहीं हाईस्कूल में वाराणसी ने बाजी मारी है। पूर्वांचल के दस जिलों का आंकड़ा देखें तो इंटरमीडिएट में वाराणसी पहले और हाईस्कूल में दूसरे स्थान पर है। सूबे में इस बार लखनऊ और गाजियाबाद ने बाजी मारी है।
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पासिंग प्रतिशत के लिहाज से बीते साल जहां मऊ ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में ही पहला स्थान हासिल किया था, वहीं इस साल ये जिला सीधे 58वें व 59वें स्थान पर पहुंच गया है। हाईस्कूल में इस जिले का पासिंग प्रतिशत 93.71 से घटकर 71.64 और इंटरमीडिएट में 94.70 से सीधे 65.81 पर आ गया है।
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खुशी से उछल पड़ीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
वहीं बलिया भी बीते साल दूसरे नंबर था और इस बार 59वें और 61वें स्थान पर पहुंच गया है। यही हाल आजमगढ़ का भी है। तीसरे पायदान से नीचे खिसककर ये जिला 71वें और 64वें नंबर पर आ गया है। इन सबके बीच वाराणसी के पासिंग प्रतिशत में इस साल काफी सुधार हुआ है।
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यूपी बोर्ड के परिणाम
सूबे में वाराणसी ने हाईस्कूल में 21वां और इंटरमीडिएट में 26वां स्थान हासिल किया है। जबकि बीते साल बनारस क्रमश: 61वें व 45वें स्थान पर था। पूर्वांचल के दस जिलों का आंकड़ा देखें तो इंटरमीडिएट में वाराणसी पहले और हाईस्कूल में दूसरे स्थान पर है। सूबे इस बार लखनऊ और गाजियाबाद ने बाजी मारी है।