महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती के भांजे प्रो. केवी कृष्णन के घर पहुंचे केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
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तमिल के राष्ट्रकवि सुब्रह्मण्यम भारती के भांजे प्रो. केवी कृष्णन ने बताया कि 1898 में मामा जब वाराणसी आए थे तो उनकी अवस्था मात्र 16 साल थी। हनुमान घाट पर वह अपनी बुआ कुप्पम्माल उर्फ रुक्मिनी अम्माल के घर ठहरे थे। जय नारायण इंटर कॉलेज में दाखिला लिया और चार साल तीन माह के बाद वह पांडिचेरी चले गए। यहां राष्ट्रकवि ने हिंदी, संस्कृत, बंगाली, मराठी, पंजाबी आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। उनका कहना था कि अंग्रेजी के बाद तमिल एकमात्र भाषा है। जो किसी और भाषा से नहीं लिया गया है।