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यूपी: 36 घंटे बाद मिली ट्रैक्टर चालक की लाश, ग्रामीणों ने पुलिस को निकालने से रोका; नौ घंटे तक पानी में रहा शव

Fri, 09 Oct 2026 08:48 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

गाजीपुर में मंगई नदी में 36 घंटे बाद ट्रैक्टर चालक का शव उतराया मिला। ग्रामीणों ने शव निकालने से पुलिस को रोक दिया और नौ घंटे तक शव पानी में रहा। सुबह सात बजे आक्रोशित ग्रामीणों ने अलावलपुर-नोनहरा मार्ग जाम कर दिया। चार लाख रुपये, प्राथमिकी वापसी और संविदा पर नौकरी समेत चार मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद शाम चार बजे जाम समाप्त हुआ।
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गाजीपुर में ट्रैक्टर चालक की लाश मिलने के बाद तनाव। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल।
नोनहरा थाना क्षेत्र के चककमरौरा गांव में राजस्व और पुलिस टीम पर हमले और लाठीचार्ज के दौरान भगदड़ में मंगई नदी में डूबे निजी ट्रैक्टर चालक रामबाबू (22) का शव तीसरे दिन शुक्रवार की सुबह सम्मनपुर गांव के गेट के पास उतराया मिला। आक्रोशित ग्रामीणों ने नदी से शव नहीं निकालने दिया और सुबह सात बजे से अलावलपुर- नोनहरा मार्ग को जाम कर दिया। 



जानकारी मिलते ही आसपास के करीब एक दर्जन गांव के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए प्रदर्शन करने लगे। एडीएम वेद सिंह चौहान और एएसपी अतुल सोनकर ग्रामीणों व परिजनों को समझाने में जुटे रहे। दैवी आपदा के तहत चार लाख नकदी, संविदा पर मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी और दर्ज प्राथमिकी वापस लेने सहित चार मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद शाम चार बजे जाम समाप्त हुआ।
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रामबाबू की फाइल फोटो और नाराजगी जताते ग्रामीण। - फोटो : संवाद
चककमरौरा गांव निवासी अरुण कुमार ने आरोप लगाते हुए बताया कि बीते सात अक्तूबर को भूमि पैमाइश के दौरान दो पक्षों में हुए कहासुनी के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि ईंट- पत्थर व लाठी व रॉड के हमले से उपनिरीक्षक सहित पांच लोग घायल हो गए थे। इधर, पुलिस के लाठीचार्ज के दौरान हुई भगदड़ के दौरान भाग रहे दो युवक नदी में कूद गए थे। एक युवक को पुलिस ने पकड़ लिया था, जबकि बड़े भाई रामबाबू नदी में डूब गए थे। 

दूसरे दिन बीते आठ अक्तूबर को एनडीआरएफ की टीम ने युवक की तलाश की, लेकिन पता नहीं चल सका था। तीसरे दिन सुबह पांच बजे सम्मन गांव के मुख्य गेट के 100 मीटर दूर उतराया मिला। ग्रामीणों ने पानी से पुलिस को शव बाहर नहीं निकालने दिया। इधर, शव नदी में उतराया मिलने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और आसपास के गांव के लोग भी घटना स्थल पर पहुंच गए। 
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नाराज लोगों से बातचीत करती पुलिस। - फोटो : संवाद
सुबह सात बजे आक्रोशित ग्रामीण अलावलपुर-नोनहरा मार्ग को जाम कर दिया। देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड़ बढ़ गई। जानकारी मिलते ही एडीएम वेद सिंह चौहान और एएसपी ग्रामीण अतुल सोनकर मौके पर पहुंच गए, लेकिन परिजन और ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। 

मृतक के पिता चंद्रमा राम ने बताया कि एडीएम और एएसपी ग्रामीण ने 54 लोगों पर दर्ज प्राथमिकी वापस लेने, पोस्टमार्टम के दौरान चार लाख रुपये नकदी देने, संविदा पर एक सदस्यों को नौकरी दिलाने, सीएम राहत कोष से सहायता दिलाने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद दोषी राजस्व व पुलिस कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने के आश्वासन पर शाम चार बजे धरना समाप्त हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी, दैवी आपदा से आर्थिक मदद सहित चार मांगों को पूरा करने के आश्वासन पर जाम समाप्त हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। - वेद सिंह चौहान, एडीएम गाजीपुर

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माैके पर हंगामा करते लोग। - फोटो : संवाद
एक दर्जन गांव के ग्रामीण ने दिया धरना, जमकर हुई नोकझोंक
निजी वाहन चालक का शव मिलने की जानकारी होते ही आसपास के सटे गांव के ग्रामीण घटना स्थल पर पहुंचने लगे। सुबह सात बजे तक देखते ही देखते चककमरौरा, गौरा, गठईया, रसूलपुर, सोनबरसा, सम्मनपुर, सवना, बरारा और नोनहरा सहित एक दर्जन के करीब 2000 से अधिक ग्रामीण पहुंच गए। इधर, पुलिस टीम ने भी मोर्चा संभाल लिया था। इस दौरान पुलिस के उच्चाधिकारियों में कार्रवाई को लेकर जमकर नोकझोंक और कहासुनी हुई। ग्रामीणों ने बताया कि जब भूमि पर स्टे था तो आखिरकार पुलिस टीम उस भूमि की पैमाइश के लिए क्यों गई थी। हालांकि एएसपी ग्रामीण अतुल सोनकर ने समझा-बुझाकर शांत कराया।
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पार्टी के लोगों से बातचीत करते अफसर। - फोटो : संवाद
नगीना के सांसद चंद्रशेखरशेखर आजाद ने परिजनों वीडियो कॉल पर किया बात
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सांसद चंद्रशेखर शेखर आजाद ने मृतक के परिजनों से वीडियो कॉल पर बात की। परिजनों से घटना की पूरी जानकारी ली। इस दौरान उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा गुंडा एक्ट और जिला बदर जैसी कार्रवाई की बात की है। इस पर उन्होंने परिजनों को आश्वासन दिया कि वह इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी से बात करेंगे। साथ ही परिजनों को आश्वासन दिया कि वह न्याय के लिए हर कदम उनके साथ खड़े हैं।
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स्थानीय लोगों के बीच पुलिस। - फोटो : संवाद
भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष को किया हाउस अरेस्ट
भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष मनोज गौतम ने बताया कि पुलिस टीम घर पहुंची और हाउस अरेस्ट कर दिया। इसके बाद उन्हें बहादुरगंज चौकी पर लाया गया। जहां उन्हें रखा गया। जानकारी होते ही उनके समर्थक भी चौकी पर पहुंच गए। पुलिस ने समर्थकों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इधर, मामला शांत होने तक पुलिस ने उन्हें चौकी पर ही रखा। जब मामला शांत हो गया तब पुलिस ने भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष को छोड़ दिया।
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लाठीचार्ज के बाद मची थी भगदड़। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
पीएसी के साथ सात थानों की फोर्स रही तैनात
मंगई नदी में शव मिलने और ग्रामीणों के घटना स्थल पर एकत्र होने की जानकारी मिलते ही पीएसी के साथ सात थानों की फोर्स ने मोर्चा संभाल लिया। इसमें कासिमाबाद, बरेसर, नोनहरा, मुहम्मदाबाद, बिरनो, मरदह, महिला थाना की टीम डटी रही। वहीं, मुहम्मदाबाद सीओ सुधाकर पांडेय सहित अन्य सीओ भी मौके पर मौजूद रहे।इस दौरान पुलिस की टीम ने चप्पे-चप्पे पर अपनी नजर रखी हुई थी। यहीं नहीं तनाव देखते ही पुलिस टीम शाम तक गांव में तैनात रही। इस दौरान गांव में आने-जाने वाले लोगों पर टीम की निगाह बनी हुई थी।

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तालाब में तलाश करती टीम। - फोटो : संवाद
तीन भाइयों में बड़े थे रामबाबू, भट्ठे पर मजदूरी करते हैं पिता
मृतक रामबाबू तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वह निजी ट्रैक्टर चलाकर परिवार में आर्थिक सहयोग करते थे। पिता चंद्रिका राम ईंट भट्ठे पर मजदूरी करके परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। सुबह मंगई नदी में शव उतराया देख मां मनोरमा देवी और परिवार के अन्य सदस्य रोने-बिलखने लगे। परिजनों को रोता-बिलखता देख ग्रामीणों की आंख भर जा रही थी। वहीं, पुलिस की लापरवाही और लाठीचार्ज के चलते हुई भगदड़ को लेकर आक्रोश भी साफ दिखाई पड़ रहा था। मां मनोरमा देवी बेटे का शव देखकर बार-बार अचेत हो जा रही थीं। यह देखकर ग्रामीणों का कलेजा फटा जा रहा था।

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मामले को लेकर बातचीत करते ग्रामीण। - फोटो : संवाद
इन मांगों पर डटे थे परिजन, इन मांगों के पूरे होने का मिला आश्वासन
ग्रामीण और परिजन 54 लोगों पर दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने, आर्थिक सहायता, दोषी राजस्व व पुलिस टीम पर प्राथमिकी दर्ज करने और भूमि पैमाइश के मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग पर अड़े थे। अधिकारियों ने शाम चार बजे मृतक के परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने, दैवी आपदा से चार लाख रुपये की आर्थिक मदद करने, सीएम राहत कोष से मदद दिलाने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर ग्रामीणों और परिजनों का आक्रोश शांत हुआ।

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पुलिस का वाहन रोकते नाराज परिजन और ग्रामीण। - फोटो : संवाद
महिलाओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
सुबह सात बजे के बाद घटना स्थल पर जैसे- जैसे ग्रामीणों की भीड़ बढ़ रही थी। इधर, पूरा घटना स्थल पुलिस छावनी में तब्दील होता जा रहा था। घर से निकलकर महिलाएं भी मांगों को लेकर घटना स्थल पर पहुंच गई थी। इस दौरान महिलाओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही धरना-प्रदर्शन पर बैठ गई। वह पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रही थीं। वह बार-बार कह रही थी कि ऐसा कभी नहीं हुआ। पुलिस की लापरवाही के चलते इस तरह की स्थिति बनी है।

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नाराज लोगों से बातचीत करती पुलिस। - फोटो : संवाद
राजस्व टीम के विरोध के बाद नदी में डूबे व्यक्ति का शव बरामद
नोनहरा थाना क्षेत्र के चकरौड़ा गांव में राजस्व संबंधी प्रकरण के निस्तारण के दौरान विरोध और हंगामे के बाद मगई नदी में डूबने की आशंका जताए गए व्यक्ति का शव शुक्रवार सुबह बरामद हुआ। सात अक्तूबर को तहसीलदार मुहम्मदाबाद के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। इस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों के विरोध और हमले में एक उपनिरीक्षक समेत कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
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रामबाबू की फाइल फोटो और तालाब के पास महिलाएं। - फोटो : संवाद
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने बताया कि विरोध के बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने सूचना दी कि उनका एक व्यक्ति मौके से भागा था और आशंका है कि वह गांव से कुछ दूर बहने वाली मगई नदी में डूब गया है। इसके बाद पुलिस ने एसडीआरएफ की टीम और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू कराई। शुक्रवार सुबह शव बरामद होने के बाद पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। एएसपी ग्रामीण ने बताया कि मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है।
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