दांतों और जबड़ों से जुड़ी समस्या से किशोर और युवा जूझ रहे हैं। इसमें 49 प्रतिशत ऐसे किशोर हैं, जिनमें टेढ़े मेढ़े दांत और जबड़े की समस्या पाई गई है। बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय के चिकित्सकों के अध्ययन में यह बात सामने आई है। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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डॉक्टरों ने 12 से 16 साल के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के किशोर पर अध्ययन किया है। टेढ़े-मेढ़े दांत और जबड़े के प्रसार का अध्ययन दंत चिकित्सा संकाय के चिकित्सकों की ओर से किया जा रहा है। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरह दिल्ली और भारत के अधिकांश जगहों पर यह समस्या 40 से 50 प्रतिशत किशोर और युवाओं में मिली है।
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पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. टीपी चतुर्वेदी के निर्देशन मेंडॉ. नीतीश शुक्ला, डॉ. आदित और डॉ. टीबी सिंह की टीम के अध्ययन में यह मिला कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर दूसरे बच्चे को तत्काल इलाज की जरूरत है।
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इसमें दांत के बाहर या अंदर वाली सतह पर ब्रैकेट लगाकर उपचार होता है, जिसमें 6 महीने से 3 साल तक का समय लगता है। बताया कि इस तरह की समस्या अनुवांशिक से होती है।