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बनारस में पारा पहुंचा 6.8 डिग्री, ठंड से राहत को लेकर मौसम विभाग ने कही ये बात

Sat, 28 Dec 2019 10:59 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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ठंड में गर्म कपड़े पहनकर निकलते लोग। - फोटो : अमर उजाला।
वाराणसी में शुक्रवार को कोल्ड वेब का असर शहर से गांव तक रहा। गलन और कोहरे ने लोगों को ठंड से कांपने पर विवश कर दिया। दिन चढ़ने के साथ ही गलन भी तेज होती गई। हालांकि दोपहर बाद भगवान भास्कर ने दर्शन तो दिए लेकिन लोगों को गलन से राहत नहीं मिली।
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मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान में दो डिग्री की बढ़ोतरी रही तो न्यूनतम तापमान में 1.3 डिग्री की गिरावट भी दर्ज की। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम 6.8 डिग्री रहा।
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शुक्रवार को पहाड़ी हवाओं का असर मैदानी भागों में देखने को मिला। सुबह से ही धूप नहीं निकलने के कारण तेज गलन और ठंड से अधिकांश लोग घरों में दुबके रहे। स्कूल बंद होने के कारण अभिभावकों ने राहत की सांस ली। नगर निगम का शहर में अलाव जलवाने का दावा भी सिफर साबित हुआ। जगह-जगह सामाजिक संगठनों और लोगों ने अपने-अपने व्यवस्था से अलाव का इंतजाम किया था।

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आम दिनों में भीड़-भाड़ से गुलजार रहने वाला गोदौलिया, मैदागिन, दालमंडी क्षेत्र में आम दिनों की अपेक्षा लोगों की भीड़ कम रही। घाटों पर भी ठंड के कारण आम दिनों की अपेक्षा आवाजाही कम रही। वहीं मणिकर्णिका घाट पर आम दिनों की अपेक्षा शवदाह के लिए आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से शवदाह करने वालों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। गलियों में शवों को रखकर लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में कोल्ड वेब के कारण गलन और ठंड बढ़ी है।
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बच्चों और बुजुर्ग को एहतियात बरतने की जरूरत
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एंड एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स के नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बीच बच्चों में भी सर्दी, खांसी, बुखार का असर देखने को मिल रहा है। बच्चे तेजी से निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। कोल्ड डायरिया और दस्त के भी लक्षण देखने को मिल रहे हैं। नवजात बच्चों के अभिभावकों को खास एहतियात बरतने की जरूरत है।
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नवजात बच्चों के लिए कंगारू मदर केयर विधि सबसे कारगर है। जैसे कंगारू अपने बच्चे को गर्माहट देकर उसकी आधी तकलीफें  दूर करता है ठीक ऐसे ही मां अपने नवजात को अपनी छाती से चिपकाकर उसे गर्माहट देती है जिससे बच्चे का तापमान सामान्य रहता है और कई समस्याएं खुद ही हल हो जाती हैं।
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निमोनिया से बचाव
डॉ. राहुल ने बताया कि निमोनिया से बचाव के लिए नवजात शिशु और बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं। बच्चों के हाथों में दस्ताने, पैरों में मोजे और कानों को हमेशा ढंककर रखें। बच्चों को उल्टी, दस्त व बुखार होने पर बिना समय गवाएं अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर चिकित्सक या विशेषज्ञ को दिखाएं और चिकित्सक के बताए अनुसार जांच कराएं।
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नहीं हैं राहत मिलने के आसार
मौसम विज्ञानी प्रो. एस.एन पांडेय का कहना है कि अभी 30 दिसंबर तक मौसम ऐसा ही रहेगा। ठंड और कोहरे से निजात नहीं मिलने वाली है। तीस दिसंबर से एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। जब यह वार्म फ्रं ट से गुजरेगा तो तापमान में कुछ वृद्धि होगी। इसका असर दो-तीन दिन रहेगा। दूसरी ओर मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 29-30 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 7 और अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा। तीस से दो जनवरी के बीच अधिकतम तापमान में वृद्धि होगी। बूंदाबादी की भी संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव आएगा।
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