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यादों में आलमबदी आजमी: नहीं था विधायकी का गुरुर, रिक्शा की करते थे सवारी; सड़क खोदकर परखते थे काम की गुणवत्ता

Thu, 23 Jul 2026 10:25 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

Alam Badi Azmi Death: सपा नेता आलमबदी आजमी के निधन से जिले के राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया। आलमबदी आजमी सादगी की पहचान और ईमानदारी की मिसाल थे। 
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आलमबदी आजमी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की निजामाबाद सीट से पांच बार विधायक रहे समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आलमबदी आजमी ने 92 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। विधायक आलमबदी की गिनती ईमानदार नेताओं में होती थी। किसी भी राजनीतिक दल का नेता हो वह आलमबदी का सम्मान करता था। हर कोई उनकी सादगी की तारीफ करता था। इसकी सादगी का परिणाम था निजामाबाद की जनता उनके ऊपर विश्वास करती थी और उन्हें पांच बार अपना प्रतिनिधि चुना। 
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आलमबदी आजमी की फाइल फोटो - फोटो : एक्स
आलमबदी आजमी ने न विधायक बनने का गुरुर और ना ही कोई दिखावा किया। नील और टीनोपाल से लकलक कुर्ता पायजामा पहने और सिर पर टोपी लगाए आलमबदी को शायद ही जिले का कोई व्यक्ति हो जो जानता और पहचानता न हो। 

इसे भी पढ़ें; UP: सबसे उम्रदराज सपा विधायक आलमबदी का निधन, 92 साल की उम्र में कहा अलविदा; आजमगढ़ की इस सीट से पांच बार जीते
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आलमबदी आजमी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
जहां आज लोग विधायक बनने के बाद गाड़ी, बंगला और अपने समर्थकों के साथ चलना शुरू कर देते हैं। वहीं सपा विधायक आलमबदी न किसी समर्थन और ना ही किसी दिखावे पर भरोसा करते थे। गाड़ी नहीं है तो वह रिक्शे पर बैठकर ही शहर में घूम लेते थे। वह एक छोटी सी दुकान पर बैठकर चाय पीने से भी गुरेज नहीं करते थे। 

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आलमबदी आजमी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आलमबदी आजमी के क्षेत्र में यदि किसी सड़क का निर्माण हो रहा है तो वह सड़क पर बैठकर उसको खोदकर उसकी गुणवत्ता की स्वयं जांच करने लगते थे। अगर कमी मिली तो ठेकेदार को फटकार भी लगाते थे। इसका परिणाम था कि जिले में जहां अन्य विधायकों के यहां काम करने के लिए ठेकेदारों की लाइन लगी रहती थी। वहीं आलमबदी आजमी के अंडर में बहुत कम ठेकेदार ही काम कराना चाहते थे। 
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आलमबदी आजमी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सपा के दिग्गज नेताओं में आलमबदी आजमी की गिनती थी। सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव और वर्तमान मुखिया अखिलेश यादव भी उनकी बातों को सुनते और उस पर अमल करते थे। उनके निधन से जिले की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके जाने से जिले की राजनीति के एक युग का अंत हो गया।
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आलमबदी आजमी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
शैक्षणिक सफर
16 मार्च 1934 को आजमगढ़ में जन्मे आलमबदी आजमी ने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने 1953 में इस्लामिया कॉलेज, गोरखपुर से 12वीं की शिक्षा पूरी की और 1956 में टेक्निकल इंस्टीट्यूट, गोरखपुर से इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया।
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शिवपाल यादव के साथ आलमबदी आजमी - फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक सफर
राजनीतिक जीवन की बात करें तो, आलमबदी आजमी ने 1996 से 2007 तक निजामाबाद विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने कई बार अपने प्रतिद्वंद्वियों को करारी शिकस्त दी, जिनमें अंगद यादव भी शामिल थे। उन्होंने निजामाबाद सीट से पांचवीं बार विधायक बनकर क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके परिवार में छह बच्चे हैं।

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