छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स के जवान वकील बिंद का रविवार को गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद रविवार शाम को राजकीय सम्मान के साथ गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार से पहले जवान का पार्थिव शरीर 20 घंटे तक एंबुलेंस में पड़ा रहा। शनिवार शाम को शव आने के बाद ही जवान के परिजन सहित सैकड़ों ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे। आगे की स्लाइड्स में जानिए ..
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वकील बिंद
- फोटो : amar ujala
गोपीगंज के मदनपुर गांव निवासी वकील बिंद छत्तीसगढ़ में तैनात थे। 15 नवंबर को दंतेवाड़ा में सड़क के किनारे उनका पार्थिव शरीर मिला था। शनिवार शाम सात बजे एंबुलेंस से पार्थिव शरीर मदनपुर गांव लाया गया। परिजन और ग्रामीण उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। धरना सारी रात जारी रहा। रविवार दोपहर तीन बजे के बाद एसडीएम ज्ञानपुर अमृता सिंह के आश्वासन पर लोग माने।
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varanasi
- फोटो : अमर उजाला
परिवार वालों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। जिसमें वकील बिंद को शहीद का दर्जा देने, दिवंगत जवान की पत्नी या भाई को नौकरी संग शहीदों को मिलने वाली सुविधाएं दिलाने की मांग की गई थी। करीब 20 घंटे बाद जवान के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से जैसे ही बाहर निकाला गया। घर और गांव की महिलाओं के रोने से वहां मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। शाम पांच बजे बिहरोजपुर गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
इसके पूर्व एसडीएम ज्ञानपुर अमृता सिंह, औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर, विधायक हंडिया हाकिम लाल बिंद, विधायक रमेश बिंद आदि ने श्रद्धांजलि दी। छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स के जवानों की ओर से भेजी गई तात्कालिक 50 हजार रुपये की मदद वकील बिंद की पत्नी सीमा बिंद को सौंपी गई। एसडीएम अमृता सिंह ने कहा कि मांगपत्र आला अधिकारियों के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा।
बताते चलें कि मदनपुर गांव निवासी रामनाथ बिंद के पुत्र वकील कुमार बिंद 2014 में छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स में भर्ती हुए थे। 2016 में उनकी शादी हुई और तकरीबन आठ माह पूर्व एक बच्चा हुआ। जब वकील बिंद के बारे में यह सूचना मिली तो पत्नी, मां और परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं गांव में शोक लहर दौड़ गई।