सूर्यपुत्र शनिदेव की जयंती पर 205 साल बाद ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। मंगलवार के दिन शनि जयंती पड़ने के कारण यह सभी के लिए परम कल्याणकारी है। बनारस में भी प्रमुख शनि मंदिरों में विशेष पूजा, शृंगार और आरती के आयोजन की तैयारियां की गई हैं। आगे की स्लाइड्स में जाने शनिदेव की महिमा...
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- फोटो : shani
इसके पूर्व 30 मई 1813 में शनि जयंती मंगलवार को मनाई गई थी। तब भी मंगल, केतु के साथ मकर राशि में और राहु, कर्क राशि में थे और बुध मेष में थे। वर्तमान में शनि धनु राशि में वक्री चल रहे हैं। शनि जयंती के मौके पर इसी योग में हर राशि के व्यक्ति के लिए बेहद ही अच्छा मौका है क्योंकि यह योग शुभ फल देने वाला है और वर्तमान समय में शनि धनु राशि में विराजमान हैं।
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इसके फलस्वरुप वृश्चिक धनु एवं मकर राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती तथा वृष एवं कन्या राशि वालों को शनि की अढ़ैया चल रही है, जिनको शनि ग्रह की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव हो या शनि ग्रह का उत्तम फल प्राप्त ना हो रहा हो उन्हें शनि जयंती के दिन शनि देव की प्रसन्नता के लिए उपवास रखकर शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए।
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शनि जयंती
इतना ही नहीं शनि जयंती यानी मंगलवार को प्रत्येक व्यक्ति को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया अवश्य जलाना होगा यदि ऐसा करते हैं तो शनि देव की विशेष कृपा आपको मिलेगी।
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महाबली हनुमान के दिन मंगलवार को शनिदेव की भी आराधना करने से कई संकटों से मुक्ति मिलेगी। बनारस के सुंदरपुर स्थित शनि धाम के पुजारी व शनि उपासक कन्हैया महाराज का कहना है कि शनि देव का जन्म सूर्य के स्वामित्व वाले नक्षत्र कृतिका में हुआ था। इस दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी पड़ रही है। शनि जयंती के अवसर पर शनि हमेशा वक्री अवस्था में होते हैं। वर्तमान में मंगल अपनी उच्च राशि मकर में है।
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शनि जयंती
कन्हैया महाराज ने बताया कि हमेशा कड़ी मुद्रा में रहने वाले भगवान शनिदेव अपनी जयंती के दिन बड़े ही विनम्र स्वभाव में रहते हैं और इस दिन यदि उनका दर्शन पूजन किया जाए तो उनकी विशेष कृपा अवश्य मिलती है। शनि जयंती के दिन शनि देव के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाने के अलावा काला कपड़ा या फिर कोई भी काली चीज का दान अवश्य करें।
हनुमान चालीसा के अलावा शनि चालीसा का पाठ इस दिन करना विशेष फलदायी होता है। इस दिन काले उड़द के दाल की खिचड़ी गरीबों में अवश्य वितरित करनी चाहिए साथ ही काले रंग की वस्तुओं का दान शुभ फलदाई है।