महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 40वें दीक्षांत समारोह का आयोजन मंगलवार को बहुत ही धूमधाम से संपन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में छात्राओं का जलवा रहा। गोल्ड मेडलिस्ट दीर्घा में 81 फीसदी भागेदारी छात्राओं की थी। यह देखकर मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा का नक्शा बदल रहा है और इस बदलाव में सबसे बड़ी भागीदार बन रही हैं बेटियां। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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गले में गोल्ड मेडल और चेहरे पर उसकी स्वर्णिम आभा। स्वर्ण पदक हासिल करने वाले हर मेधावी का चेहरा सोने की चमक और खुशियों से दमक उठा। अपनी मेहनत और लगन की बदौलत गोल्ड मेडल हासिल करना, उनका लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा था। मन में खुशियों का समंदर इस बात पर भी उमड़ा क्योंकि उनकी इस मेहनत से उनके मां पिता गौरवान्वित थे। अपने बच्चों की सफलता से उनका सिर भी गौरव से ऊंचा और सीना चौड़ा हुआ जा रहा था।
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मंगलवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडलिस्ट दीर्घा में 81 फीसदी भागेदारी छात्राओं की थी। राज्यपाल ने कहा कि यह एक सुखद संदेश है। लड़कियां आगे बढ़ रही हैं। बीते शैक्षणिक सत्र में प्रदेश भर में 15,60,375 स्नातकों को उपाधि दी गई। इनमें 7,97,646 छात्राएं थीं। बीते साल प्रदेश भर में 1653 गोल्ड मेडल दिए गए। इसमें से 1085 गोल्ड मेडल पर छात्राआें का कब्जा था।
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दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने उपाधि धारकों से आह्वान किया कि वो सूर्य जैसे आगे बढ़ें और चमकें। सूर्य की आभा की तरह अगर उन्हें दमकना है तो सदैव चलते रहना होगा। कहा कि जो सो गया, समझो उसका भाग्य भी सो गया। विद्यार्थियों को सलाह दी कि आप शार्टकट के चक्कर में ना पड़ें। अगर शार्टकट के रास्ते पर जाएंगे तो धोखा खाएंगे। अगर आप असफल हो रहे हैं तो शांत चित्त होकर आत्म निरीक्षण करें, जहां कमियां हों उन्हें सुधारे। विश्वास मानिए सफलता आपके कदम चूमेगी।
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राज्यपाल ने छात्रों से कहा कि अब आप सोच लीजिए, लड़कियां इतनी तेजी से दौड़ेंगी तो आपका क्या होगा? लड़कियां आगे बढ़ रही हैं और लड़के तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं, ये और भी सुखद संदेश है। उन्होंने कहा कि पहले जहां विश्वविद्यालयों का दीक्षांत समारोह तीन व चार साल में हुआ करता था, वहीं अब विश्वविद्यालय हर साल दीक्षांत समारोह करा रहे हैं। बताया कि बीते सत्र में यूपी के 28 विश्वविद्यालयों का दीक्षांत समारोह 253 दिन में हुआ था। इस साल सभी दीक्षांत समारोह 84 दिनों में पूरे कर लिए जाएंगे।
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इसके पूर्व राज्यपाल ने स्नातक और स्नातकोत्तर के टॉपर विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से नवाजा। 58 में से उपस्थित 54 मेधावियों को मेडल दिया गया। इसमें स्नातकोत्तर स्तर पर सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली एमए संस्कृत की छात्रा निकिता पांडेय को विश्वविद्यालय मेडल के साथ डॉ. विभूति नारायण सिंह स्मृति स्वर्ण पदक से नवाजा गया। वहीं एनटीपीसी परिसर के छात्र वसीम अहमद को नेशनल पैरा क्रिकेट टी-20 टीम के कप्तान के रूप में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया।
राज्यपाल ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज आपने अपने जीवन को पहला पड़ाव पार कर लिया है। दूसरे पड़ाव पर निकल रहे हैं। अब आप और कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में है। ऐसे में सफल होना है तो कठोर परिश्रम करना होगा। प्रमाणिकता और दूरदर्शिता के साथ आप आगे बढ़ें। स्वागत कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने किया।